Devbhoomi PCSUKPCS & UKSSSC · उत्तराखंड परीक्षा तैयारी

उत्तराखंड की प्रमुख योजनाएँ

परीक्षा में नियमित रूप से पूछी जाने वाली उत्तराखंड सरकार की योजनाएँ। राशियाँ अधिसूचना अनुसार बदलती हैं, इसलिए यहाँ केवल स्थिर तथ्य दिए गए हैं।

अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना

केंद्र की आयुष्मान भारत योजना का यह राज्य-विस्तार उत्तराखंड की सबसे व्यापक स्वास्थ्य पहल है। जहाँ PM-JAY सामाजिक-आर्थिक जनगणना के आधार पर चयनित परिवारों तक सीमित है, वहाँ राज्य ने कवरेज का दायरा बढ़ाकर इसे अधिक समावेशी बनाया। पर्वतीय भूगोल में रेफरल और द्वितीयक देखभाल की कमी इसकी सबसे बड़ी व्यावहारिक चुनौती रही है, जिससे यह योजना स्वास्थ्य अवसंरचना के प्रश्नों से भी जुड़ जाती है।

⚠ पात्रता एवं कवरेज सीमा की नवीनतम अधिसूचना देखें

नंदा गौरा योजना

यह योजना दो चरणों में सहायता देती है — बालिका के जन्म पर और बारहवीं उत्तीर्ण करने पर — जिससे इसका उद्देश्य केवल जन्म-प्रोत्साहन नहीं बल्कि शिक्षा की निरंतरता भी है। नाम चिपको आंदोलन की गौरा देवी के सम्मान में रखा गया, जो राज्य की पर्यावरणीय और स्त्री-नेतृत्व की परंपरा को सामाजिक नीति से जोड़ता है। महिला एवं बाल विकास विभाग की यह प्रमुख योजना लिंगानुपात सुधार के व्यापक प्रयासों का भाग है।

⚠ सहायता राशि एवं आय-सीमा अधिसूचना अनुसार बदलती है

मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना

कोविड काल में लाखों प्रवासियों की वापसी के बाद यह योजना विशेष महत्त्व पा गई, क्योंकि इसने विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में स्वरोजगार हेतु ऋण पर मार्जिन-मनी अनुदान उपलब्ध कराया। पर्वतीय क्षेत्रों में अनुदान का प्रतिशत अधिक रखा गया, ताकि पलायन-प्रभावित इलाकों में उद्यम बने। इसे ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग की संस्तुतियों के साथ पढ़ना उपयोगी है।

⚠ अनुदान प्रतिशत श्रेणी/क्षेत्र अनुसार — नवीनतम दिशानिर्देश देखें

लखपति दीदी पहल

स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं की वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक करने का यह लक्ष्य राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से क्रियान्वित होता है। रणनीति आजीविका विविधीकरण पर टिकी है — कृषि के साथ पशुपालन, स्थानीय उत्पाद और होमस्टे। उत्तराखंड में सफलता के बाद इस मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर अपनाया गया, जो राज्य-से-केंद्र नीति-प्रसार का दिलचस्प उदाहरण है।

⚠ लक्ष्य-संख्या समय-समय पर संशोधित होती है

मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना

पर्वतीय महिलाओं का बड़ा श्रम-समय चारे के लिए जंगल जाने में बीतता है, जिसमें गिरने और वन्यजीव मुठभेड़ का जोखिम भी रहता है। यह योजना रियायती दर पर पौष्टिक साइलेज उपलब्ध कराकर उस श्रम और जोखिम दोनों को घटाती है, साथ ही दुग्ध उत्पादन बढ़ाती है। 'घस्यारी' शब्द स्वयं पर्वतीय समाज में घास काटने वाली महिला के लिए प्रयुक्त होता है — योजना का नाम ही उसके सामाजिक संदर्भ को दर्शाता है।

समान नागरिक संहिता (UCC) — उत्तराखंड

उत्तराखंड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला भारत का पहला राज्य बना, जिसमें विवाह, तलाक़, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों के पंजीकरण हेतु समान नियम बनाए गए। अनुसूचित जनजातियाँ इसके दायरे से बाहर रखी गईं। संविधान के अनुच्छेद 44 में समान नागरिक संहिता नीति-निदेशक तत्त्व के रूप में उल्लिखित है, और मसौदा समिति की अध्यक्षता न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई ने की थी।

उत्तराखंड पलायन आयोग

ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग का मुख्यालय पौड़ी में है — स्वयं सर्वाधिक पलायन-प्रभावित क्षेत्र में, जो एक सांकेतिक निर्णय था। इसकी रिपोर्टों ने 'भुतहा गाँव' अर्थात पूर्णतः खाली हो चुके गाँवों की संख्या, पलायन के कारण और ज़िलेवार आँकड़े सामने रखे। रोज़गार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को प्रमुख कारण पाया गया, जिससे यह आयोग राज्य की लगभग हर विकास-योजना के मूल्यांकन का संदर्भ-बिंदु बन गया।

होमस्टे (दीनदयाल उपाध्याय गृह आवास) योजना

दीनदयाल उपाध्याय गृह आवास योजना का उद्देश्य पर्यटन-आय को होटल-केंद्रित शहरों से गाँवों तक पहुँचाना है, जिसके लिए पारंपरिक घरों को होमस्टे में बदलने पर पूँजी और ब्याज अनुदान दिया जाता है। इससे पलायन में कमी और स्थानीय संस्कृति के संरक्षण की दोहरी अपेक्षा जुड़ी है। इसे राज्य की पर्यटन नीति तथा '13 डिस्ट्रिक्ट, 13 डेस्टिनेशन' पहल के साथ जोड़कर पढ़ना चाहिए।

गौरा देवी कन्या धन योजना

बीपीएल परिवारों की बालिकाओं को इंटरमीडिएट उत्तीर्ण करने पर एकमुश्त सहायता देने वाली यह योजना शिक्षा-पूर्णता को प्रोत्साहित करती है। इसका नाम चिपको आंदोलन की गौरा देवी के सम्मान में है, जिन्होंने 1974 में रैणी गाँव में महिला मंगल दल का नेतृत्व करते हुए वन कटान रोका था। परीक्षा में योजना और आंदोलन दोनों को जोड़कर प्रश्न बनते हैं, इसलिए इन्हें साथ याद रखना उपयोगी है।

स्पर्श गंगा अभियान

स्पर्श गंगा राज्य का जन-भागीदारी आधारित अभियान है, जो केंद्र की नमामि गंगे परियोजना से भिन्न किंतु पूरक है। जहाँ नमामि गंगे मुख्यतः अवसंरचना — सीवेज ट्रीटमेंट और घाट विकास — पर केंद्रित है, वहाँ स्पर्श गंगा स्वैच्छिक सफाई, जन-जागरण और स्थानीय भागीदारी पर बल देता है। नदी-स्वच्छता कार्यक्रमों की केंद्र-राज्य तुलना परीक्षा में पूछी जाती है, इसलिए दोनों का अंतर स्पष्ट रखें।

किसान पेंशन योजना

वृद्ध कृषकों को मासिक पेंशन देने वाली यह योजना समाज कल्याण विभाग की सामाजिक सुरक्षा पेंशनों की शृंखला का भाग है, जिसमें वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन भी सम्मिलित हैं। पात्रता की एक विशिष्ट शर्त यह है कि कृषक स्वयं अपनी भूमि जोतता हो, जिससे यह अनुपस्थित भूस्वामियों को बाहर रखती है। पेंशन-योजनाओं को एक सूची के रूप में याद करना परीक्षा की दृष्टि से अधिक प्रभावी है।

⚠ पात्रता-आयु व राशि नवीनतम अधिसूचना से मिलान करें

एक जनपद दो उत्पाद (ODTP)

इस पहल के अंतर्गत प्रत्येक ज़िले के दो विशिष्ट उत्पादों को ब्रांडिंग, विपणन और कौशल-सहायता दी जाती है, जिससे स्थानीय शिल्प और कृषि-उत्पाद बाज़ार से जुड़ सकें। ऐपण कला, रिंगाल शिल्प, तेजपात और भोटिया दन जैसे उत्पाद इसके उदाहरण हैं। इसे उत्तराखंड के भौगोलिक संकेतक प्राप्त उत्पादों की सूची के साथ पढ़ना चाहिए, क्योंकि दोनों विषय आर्थिक और सांस्कृतिक खंड में जुड़कर पूछे जाते हैं।

उत्तराखंड की GI-टैग धरोहर

भौगोलिक संकेतक किसी उत्पाद की गुणवत्ता को उसके उत्पत्ति-क्षेत्र से जोड़कर कानूनी पहचान देता है, जिसका आधार वस्तुओं का भौगोलिक उपदर्शन अधिनियम 1999 है। उत्तराखंड के तेजपात, ऐपण कला, भोटिया दन, थुलमा, च्यूरा तेल और मुनस्यारी राजमा जैसे उत्पादों को यह दर्जा मिला है। GI से किसानों और शिल्पकारों को बेहतर मूल्य तथा नकल से संरक्षण मिलता है। नए GI समय-समय पर जुड़ते रहते हैं, इसलिए परीक्षा से पूर्व नवीनतम सूची अवश्य देखें।

ई-ग्राम स्वराज व पंचायत डिजिटलीकरण

ई-ग्राम स्वराज पंचायतों के नियोजन, बजट और भुगतान को एक ही पोर्टल पर लाकर पारदर्शिता और निगरानी बढ़ाता है। उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था लागू है, जिसका संवैधानिक आधार 73वाँ संशोधन है, किंतु पर्वतीय भूगोल में छोटी और बिखरी बसावटें इसके क्रियान्वयन को जटिल बनाती हैं। यह विषय पंचायत वित्त और डिजिटल इंडिया दोनों खंडों से प्रश्न उत्पन्न करता है।

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