उत्तरायणी मेला
मकर संक्रांति पर बागेश्वर में लगने वाला ऐतिहासिक व्यापारिक-सांस्कृतिक मेला।
विस्तार से
मकर संक्रांति पर बागेश्वर में सरयू और गोमती के संगम पर लगने वाला उत्तरायणी मेला कुमाऊँ का सबसे ऐतिहासिक व्यापारिक-सांस्कृतिक आयोजन है और बागनाथ मंदिर से जुड़ा है। इसका राजनीतिक महत्त्व 1921 में तब बना जब इसी मेले में बद्रीदत्त पांडे के नेतृत्व में अभ्यर्थियों ने बेगार-रजिस्टर सरयू में प्रवाहित कर कुली-बेगार प्रथा के अंत की घोषणा की — जिसे गांधीजी ने रक्तहीन क्रांति कहा।
मुख्य तथ्य
| स्थान | बागेश्वर (सरयू-गोमती संगम) |
| काल | मकर संक्रांति |
| स्वरूप | व्यापारिक + सांस्कृतिक |
परीक्षा-दृष्टि
- 1921 के कुली-बेगार आंदोलन की घोषणा इसी मेले में हुई थी
और गहराई से
- बागेश्वर में सरयू-गोमती संगम पर; बागनाथ मंदिर से जुड़ा
- 1921 में यहीं बद्रीदत्त पांडे के नेतृत्व में बेगार-रजिस्टर विसर्जित
- कुमाऊँ के व्यापारिक मेलों में सर्वाधिक ऐतिहासिक