टिहरी बाँध विरोध
विस्थापन और भूकंप-संवेदनशीलता के प्रश्नों पर उठा पर्यावरणीय प्रतिरोध।
विस्तार से
टिहरी बाँध के विरुद्ध चला आंदोलन विकास और पर्यावरण के बीच भारत की सबसे लंबी बहसों में से एक है। सुंदरलाल बहुगुणा ने दीर्घ अनशन और 'धरती बचाओ' अपील के माध्यम से इसे राष्ट्रीय मुद्दा बनाया। विरोध के मुख्य तर्क थे — भूकंपीय ज़ोन चार में विशाल जलाशय का जोखिम, लाखों टन गाद का जमाव, और पूरी नगरी सहित सौ से अधिक गाँवों का विस्थापन। परियोजना पूरी हुई, किंतु इसने पुनर्वास नीति और पर्यावरणीय प्रभाव आकलन की प्रक्रिया को स्थायी रूप से प्रभावित किया।
मुख्य तथ्य
| प्रमुख स्वर | सुंदरलाल बहुगुणा |
| मुद्दे | विस्थापन · भूकंप-संवेदनशीलता |
| नदी | भागीरथी |
परीक्षा-दृष्टि
- विकास बनाम पर्यावरण की बहस का क्लासिक भारतीय उदाहरण
और गहराई से
- सुंदरलाल बहुगुणा का दीर्घ अनशन व 'धरती बचाओ' अपील
- भूकंपीय जोखिम व गाद (siltation) के तकनीकी प्रश्न
- विकास बनाम विस्थापन — पर्यावरणीय नैतिकता का केस स्टडी