रिंगाल शिल्प
पर्वतीय बाँस से टोकरी और चटाई बनाने की वन-आधारित पारंपरिक आजीविका।
विस्तार से
रिंगाल एक बौना बाँस है जो लगभग एक से ढाई हज़ार मीटर की ऊँचाई पर उगता है और मध्य हिमालयी पट्टी की एक प्रमुख गैर-काष्ठ वनोपज है। इससे टोकरी, सूप, चटाई, कलमदान और सजावटी वस्तुएँ बनाई जाती हैं। यह शिल्प वन-आधारित आजीविका का उदाहरण है, जिसमें कच्चा माल स्थानीय रूप से नवीकरणीय है। बाँस एवं रेशा विकास से जुड़ी योजनाएँ तथा स्वरोजगार कार्यक्रम इसे बाज़ार से जोड़ने का प्रयास करते हैं।
मुख्य तथ्य
| कच्चा माल | रिंगाल (पर्वतीय बाँस) |
| उत्पाद | टोकरी · चटाई · सजावट |
| क्षेत्र | मध्य हिमालयी पट्टी |
परीक्षा-दृष्टि
- वन-आधारित आजीविका — स्वरोजगार योजनाओं से जोड़कर पढ़ें
और गहराई से
- रिंगाल = बौना बाँस, 1000-2500 मीटर ऊँचाई पर
- टोकरी, सूप, चटाई, कलमदान व सजावटी वस्तुएँ
- बाँस एवं रेशा विकास बोर्ड से जुड़ी आजीविका योजनाएँ