फूलदेई
चैत्र संक्रांति पर बच्चों द्वारा देहरी पर पुष्प अर्पित करने का वसंत पर्व।
विस्तार से
चैत्र संक्रांति पर मनाया जाने वाला फूलदेई वसंत के आगमन का बाल-पर्व है, जिसमें बच्चे फ्योंली, बुरांश और अन्य वसंत-पुष्प घरों की देहरी पर अर्पित करते हैं और बदले में चावल, गुड़ तथा दक्षिणा पाते हैं। 'घोघा माता' की लोक-परंपरा इससे जुड़ी है। कृषि-चक्र के आरंभ से जुड़ा यह पर्व दर्शाता है कि उत्तराखंड के अधिकांश लोकपर्व ऋतु और खेती की लय पर आधारित हैं।
मुख्य तथ्य
| काल | चैत्र संक्रांति (वसंत) |
| पात्र | बच्चे — 'फूलारी' |
| पुष्प | फ्योंली, बुरांश |
परीक्षा-दृष्टि
- ऋतु-आधारित लोकपर्व — कृषि चक्र से सीधा संबंध
और गहराई से
- फ्योंली, बुरांश व अन्य वसंत-पुष्प देहरी पर अर्पित
- बच्चों को चावल, गुड़ व दक्षिणा दी जाती है
- ऋतु-कृषि चक्र से जुड़ा — 'घोघा माता' की लोक-परंपरा