ऊपरी गंगा नहर, रुड़की
हरिद्वार से निकलने वाली उन्नीसवीं सदी की विशाल सिंचाई नहर परियोजना।
विस्तार से
हरिद्वार से निकलने वाली ऊपरी गंगा नहर का निर्माण 1854 में प्रोबी कॉटले के निर्देशन में पूरा हुआ और यह उन्नीसवीं सदी की सबसे महत्वाकांक्षी सिंचाई परियोजनाओं में थी, जिसने गंगा-यमुना दोआब की कृषि बदल दी। रुड़की में सोलानी नदी के ऊपर बना जलसेतु तत्कालीन अभियांत्रिकी की उल्लेखनीय उपलब्धि है। इसी परियोजना के लिए प्रशिक्षित अभियंता तैयार करने हेतु रुड़की इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना हुई, जो आज IIT रुड़की है।
मुख्य तथ्य
| आरंभ | हरिद्वार से |
| उद्देश्य | सिंचाई (दोआब क्षेत्र) |
| विरासत | अभियांत्रिकी धरोहर |
परीक्षा-दृष्टि
- भारत की बड़ी नहर परियोजनाओं में अग्रणी — सिंचाई इतिहास का अध्याय
और गहराई से
- 1854 में प्रोबी कॉटले के निर्देशन में आरंभ
- सोलानी जलसेतु (एक्वाडक्ट) — अभियांत्रिकी की उपलब्धि
- रुड़की इंजीनियरिंग कॉलेज (अब IIT) की स्थापना इसी परियोजना के संदर्भ में