नशा नहीं रोज़गार दो
शराबबंदी और रोज़गार की माँग को लेकर चला जन-आंदोलन, जिसमें महिला भागीदारी प्रमुख रही।
विस्तार से
अस्सी के दशक में कुमाऊँ और गढ़वाल में चला 'नशा नहीं रोज़गार दो' आंदोलन शराब की दुकानों के विरुद्ध और स्थानीय रोज़गार के पक्ष में था। इसकी सबसे बड़ी विशेषता महिला मंगल दलों की अग्रणी भूमिका थी, जिन्होंने शराबबंदी को घरेलू हिंसा और आर्थिक बदहाली से जोड़कर देखा। इस आंदोलन ने ग्रामीण नेतृत्व की एक पूरी पीढ़ी तैयार की, जो आगे चलकर राज्य निर्माण आंदोलन की रीढ़ बनी।
मुख्य तथ्य
| काल | 1980 का दशक |
| माँग | शराबबंदी व रोज़गार |
| क्षेत्र | कुमाऊँ-गढ़वाल |
परीक्षा-दृष्टि
- महिला भागीदारी प्रमुख — राज्य आंदोलन की पृष्ठभूमि तैयार करने वाला
और गहराई से
- 1984 से 1990 के दशक में कुमाऊँ-गढ़वाल में व्यापक
- शराब की दुकानों के विरुद्ध महिला मंगल दलों की भूमिका
- राज्य आंदोलन के नेतृत्व-वर्ग को तैयार करने वाला मंच