नैन सिंह रावत की जोहार
जोहार घाटी के उस अन्वेषक की भूमि, जिसने तिब्बत का गुप्त सर्वेक्षण किया।
विस्तार से
पिथौरागढ़ की जोहार घाटी से आए नैन सिंह रावत उन 'पंडित' अन्वेषकों में प्रमुख थे जिन्हें ब्रिटिश सर्वेक्षण विभाग ने तिब्बत के गुप्त सर्वेक्षण के लिए प्रशिक्षित किया। वे समान लंबाई के कदम गिनकर दूरी मापते थे और प्रार्थना-चक्र में गुप्त रूप से आँकड़े छिपाते थे। ल्हासा की स्थिति और सांगपो नदी के मार्ग का निर्धारण उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि रही, जिसके लिए 1877 में उन्हें रॉयल ज्योग्राफिकल सोसाइटी का स्वर्ण पदक मिला।
मुख्य तथ्य
| क्षेत्र | जोहार घाटी, पिथौरागढ़ |
| कार्य | तिब्बत का गुप्त सर्वेक्षण |
| उपनाम | 'पंडित' अन्वेषक |
परीक्षा-दृष्टि
- ल्हासा की स्थिति व मार्ग-मापन — भारतीय सर्वेक्षण इतिहास का गौरव
और गहराई से
- 'पंडित' अन्वेषकों में प्रमुख; कदम गिनकर दूरी मापने की विधि
- 1877 में रॉयल ज्योग्राफिकल सोसाइटी का स्वर्ण पदक
- चचेरे भाई किशन सिंह रावत भी सर्वेक्षक — मणि सिंह भी इसी परिवार से