मुनस्यारी व पंचाचूली
जोहार घाटी का प्रवेश-द्वार, जहाँ से पंचाचूली शिखर-श्रृंखला दिखाई देती है।
विस्तार से
पिथौरागढ़ की जोहार घाटी का प्रवेश-द्वार मुनस्यारी पंचाचूली शिखर-शृंखला के सामने बसा है, जिसकी पाँच चोटियों से पांडवों की 'रसोई' की लोक-कथा जुड़ी है। यह मिलम, रालम और नामिक हिमनदों तक पहुँचने का आधार-शिविर है। स्थानीय अर्थव्यवस्था भोटिया ऊन शिल्प और GI-टैग प्राप्त मुनस्यारी राजमा पर टिकी है, जिससे यह क्षेत्र सीमांत पर्यटन और परंपरागत आजीविका दोनों का उदाहरण बनता है।
मुख्य तथ्य
| ज़िला | पिथौरागढ़ |
| शिखर | पंचाचूली (पाँच चोटियाँ) |
| GI | मुनस्यारी राजमा |
परीक्षा-दृष्टि
- जोहार घाटी का प्रवेश — सीमांत पर्यटन व GI उत्पाद दोनों
और गहराई से
- पंचाचूली की पाँच चोटियाँ — पांडवों की 'रसोई' की लोक-कथा
- मिलम, रालम व नामिक हिमनदों का प्रवेश-द्वार
- भोटिया ऊन शिल्प व राजमा — स्थानीय अर्थव्यवस्था