मोलाराम व गढ़वाल शैली
गढ़वाल चित्रशैली को स्वरूप देने वाले कवि-चित्रकार की कला-परंपरा।
विस्तार से
अठारहवीं शताब्दी में श्रीनगर गढ़वाल के दरबार से जुड़े मोलाराम कवि, चित्रकार और इतिहास-लेखक तीनों थे। उनके परिवार की चित्रकला परंपरा से गढ़वाल शैली विकसित हुई, जो कांगड़ा शैली के निकट होते हुए भी स्थानीय भू-दृश्य, वेशभूषा और रंग-संयोजन में विशिष्ट है। बीसवीं सदी में मुकंदी लाल के शोध ने इस शैली को अकादमिक पहचान दिलाई, और आज यह पहाड़ी लघुचित्रण की स्वतंत्र शाखा मानी जाती है।
मुख्य तथ्य
| काल | 18वीं शताब्दी |
| क्षेत्र | श्रीनगर (गढ़वाल) |
| योगदान | गढ़वाल चित्रशैली |
परीक्षा-दृष्टि
- कवि, चित्रकार व इतिहास-लेखक — पहाड़ी लघुचित्रण की गढ़वाल शाखा
और गहराई से
- गढ़वाल नरेश के दरबार से संबद्ध; तोमर वंश के चित्रकार-परिवार से
- कांगड़ा शैली से निकटता किंतु स्थानीय भू-दृश्य की विशिष्टता
- 'गढ़वाल पेंटिंग' पर मुकंदी लाल का शोध महत्वपूर्ण