मंडुवा व झंगोरा (मोटे अनाज)
पर्वतीय खेती के पोषक और सूखा-सहिष्णु परंपरागत अनाज।
विस्तार से
मंडुवा अर्थात रागी और झंगोरा अर्थात बार्नयार्ड मिलेट उत्तराखंड की पारंपरिक पर्वतीय फसलें हैं, जो कम जल और कम उर्वरता वाली भूमि में भी उपज देती हैं। ये कैल्शियम और रेशा-प्रचुर होने के कारण पोषण की दृष्टि से चावल-गेहूँ से श्रेष्ठ मानी जाती हैं। हरित क्रांति के दौर में इनका क्षेत्रफल घटा, किंतु 2023 के अंतरराष्ट्रीय मिलेट वर्ष और 'श्री अन्न' नीति के बाद इनकी वापसी पर्वतीय खाद्य सुरक्षा का महत्वपूर्ण प्रश्न बन गई है।
मुख्य तथ्य
| फसलें | मंडुवा (रागी) · झंगोरा |
| गुण | पोषक · सूखा-सहिष्णु |
| संदर्भ | श्री अन्न / मिलेट्स |
परीक्षा-दृष्टि
- पर्वतीय खाद्य सुरक्षा व पोषण — कृषि खंड का समकालीन प्रश्न
और गहराई से
- मंडुवा = रागी/फिंगर मिलेट; झंगोरा = बार्नयार्ड मिलेट
- कैल्शियम व रेशा-प्रचुर; कम जल में उपज
- 2023 अंतरराष्ट्रीय मिलेट वर्ष — 'श्री अन्न' नीति से जोड़ें