मिलम व जोहार घाटी
गोरी गंगा की ऊपरी घाटी, जो कभी तिब्बत व्यापार का प्रमुख मार्ग थी।
विस्तार से
पिथौरागढ़ की जोहार घाटी में मिलम हिमनद से गोरी गंगा निकलती है। 1962 से पूर्व यह घाटी भोटिया व्यापारियों के माध्यम से तिब्बत के साथ ऊन और नमक के व्यापार का प्रमुख मार्ग थी; सीमा बंद होने के बाद यहाँ की अर्थव्यवस्था ढह गई और बड़े पैमाने पर पलायन हुआ। इसी घाटी से नैन सिंह और किशन सिंह रावत जैसे सर्वेक्षक निकले, जिससे यह क्षेत्र आर्थिक और बौद्धिक दोनों इतिहास में महत्वपूर्ण है।
मुख्य तथ्य
| ज़िला | पिथौरागढ़ |
| नदी | गोरी गंगा |
| इतिहास | भोटिया व्यापार मार्ग |
परीक्षा-दृष्टि
- 1962 के बाद तिब्बत व्यापार बंद — पलायन व सीमांत अर्थव्यवस्था का अध्याय
और गहराई से
- मिलम हिमनद से गोरी गंगा का उद्गम
- 1962 से पूर्व भोटिया व्यापारी तिब्बत से ऊन-नमक व्यापार करते थे
- नैन सिंह व किशन सिंह रावत इसी घाटी से — सर्वेक्षण इतिहास