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कुली-बेगार आंदोलन

बलपूर्वक श्रम की प्रथा के विरुद्ध कुमाऊँ का ऐतिहासिक जनांदोलन।

विस्तार से

कुमाऊँ में बेगार, बरदायश और कुली-उतार नामक तीन प्रकार की जबरन सेवाएँ प्रचलित थीं, जिनमें ग्रामीणों को बिना पारिश्रमिक अधिकारियों का सामान ढोना पड़ता था। 1921 की मकर संक्रांति पर बागेश्वर में बद्रीदत्त पांडे, हरगोविंद पंत और चिरंजीलाल के नेतृत्व में हजारों लोगों ने बेगार-रजिस्टर सरयू में प्रवाहित कर दिए। बिना हिंसा के प्रथा समाप्त होने के कारण गांधीजी ने इसे रक्तहीन क्रांति कहा।

मुख्य तथ्य

वर्ष1921
स्थानबागेश्वर, सरयू तट
स्वरूपबेगार-रजिस्टर विसर्जन

परीक्षा-दृष्टि

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