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जौलजीबी व थल मेला

काली-गोरी संगम पर लगने वाले सीमांत व्यापार मेले, भोटिया परंपरा से विकसित।

विस्तार से

पिथौरागढ़ के सीमांत मेले भोटिया, नेपाली और तिब्बती व्यापार परंपरा से विकसित हुए। काली और गोरी नदियों के संगम पर नवंबर में लगने वाला जौलजीबी मेला सीमापार सांस्कृतिक संपर्क का प्रतीक है, जबकि रामगंगा तट पर थल मेला स्थानीय व्यापार का केंद्र रहा। 1962 के बाद तिब्बत व्यापार बंद होने से इनका आर्थिक स्वरूप बदला, पर सांस्कृतिक महत्त्व बना रहा।

मुख्य तथ्य

जौलजीबीकाली-गोरी संगम, पिथौरागढ़
कालनवंबर (परंपरागत)
स्वरूपसीमांत व्यापार मेला

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