इगास बग्वाल
दीपावली के ग्यारह दिन बाद गढ़वाल में भैलो जलाकर मनाया जाने वाला पर्व।
विस्तार से
गढ़वाल में दीपावली के ग्यारह दिन बाद मनाया जाने वाला इगास बग्वाल भैलो जलाकर मनाया जाता है — चीड़ की लकड़ी और रस्सी से बनी अग्नि-माला घुमाना इसका केंद्रीय दृश्य है। लोक-मान्यता इसे वीर माधो सिंह भंडारी के तिब्बत अभियान से देर से लौटने की कथा से जोड़ती है। हाल के वर्षों में राज्य सरकार ने इसे प्रोत्साहित कर पलायन कर चुके लोगों को गाँव लौटने के लिए प्रेरित करने का सांस्कृतिक प्रयास किया है।
मुख्य तथ्य
| काल | दीपावली के 11 दिन बाद |
| क्षेत्र | गढ़वाल |
| प्रतीक | भैलो (अग्नि-रस्सी) |
परीक्षा-दृष्टि
- लोक-मान्यता माधो सिंह भंडारी की विजय-वापसी से जुड़ी
और गहराई से
- माधो सिंह भंडारी — तिब्बत अभियान से देर से लौटने की लोक-कथा
- भैलो: चीड़ की लकड़ी व रस्सी से बनी अग्नि-माला
- राज्य सरकार ने इगास को सार्वजनिक अवकाश के रूप में प्रोत्साहित किया