गंगोत्री व गोमुख
भागीरथी का उद्गम-क्षेत्र, जहाँ गोमुख हिमनद से निकलकर नदी मैदानों की ओर बढ़ती है।
विस्तार से
गंगोत्री हिमनद लगभग तीस किलोमीटर लंबा है और इसके अग्रभाग गोमुख से भागीरथी निकलती है। वर्तमान मंदिर अठारहवीं शताब्दी में गोरखा सेनापति द्वारा बनवाया गया, जबकि नदी का धार्मिक महत्त्व कहीं प्राचीन है। यह क्षेत्र गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान के भीतर आता है, जहाँ हिम तेंदुआ और भरल पाए जाते हैं। हिमनद के निरंतर पीछे हटने के मापन इसे जलवायु परिवर्तन के भारतीय अध्ययनों का केंद्रीय स्थल बनाते हैं।
मुख्य तथ्य
| ज़िला | उत्तरकाशी |
| नदी | भागीरथी |
| उद्गम | गोमुख (गंगोत्री हिमनद) |
परीक्षा-दृष्टि
- हिमनद का पीछे हटना — जलवायु परिवर्तन प्रश्नों का प्रिय उदाहरण
और गहराई से
- गोमुख गंगोत्री हिमनद का अग्रभाग; हिमनद लगभग 30 किमी लंबा
- भागीरथी + अलकनंदा = गंगा (देवप्रयाग); गंगोत्री मंदिर 18वीं सदी में गोरखा सेनापति द्वारा
- गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान — हिम तेंदुआ व भरल का आवास