घी संक्रांति (ओलगिया)
भाद्रपद संक्रांति पर कृषि-समृद्धि और भेंट-परंपरा से जुड़ा लोकपर्व।
विस्तार से
भाद्रपद संक्रांति पर मनाया जाने वाला घी संक्रांति, जिसे ओलगिया भी कहते हैं, कृषि-समृद्धि का पर्व है जिसमें घी और नवान्न ग्रहण करने की परंपरा है। इसका उद्भव सामंती काल की 'ओलग' प्रथा से माना जाता है, जिसमें शिल्पकार और काश्तकार अपने स्वामियों को भेंट देते थे। समय के साथ यह प्रथा एकतरफा भेंट से पारस्परिक लोकपर्व में बदल गई — सामाजिक संबंधों के रूपांतरण का दिलचस्प उदाहरण।
मुख्य तथ्य
| काल | भाद्रपद संक्रांति |
| भाव | कृषि समृद्धि |
| परंपरा | भेंट/ओलग देने की प्रथा |
परीक्षा-दृष्टि
- ओलग परंपरा — सामंती काल की भेंट-प्रथा से लोकपर्व तक
और गहराई से
- भाद्रपद संक्रांति; इसे 'ओलगिया' भी कहते हैं
- शिल्पकार व काश्तकार द्वारा भेंट (ओलग) देने की सामंती परंपरा से उद्भव
- घी व नवान्न ग्रहण — कृषि-समृद्धि का प्रतीक