देवप्रयाग संगम
अलकनंदा और भागीरथी का संगम, जहाँ से नदी 'गंगा' कहलाती है।
विस्तार से
देवप्रयाग पंच प्रयागों में अंतिम है, जहाँ अलकनंदा और भागीरथी मिलकर 'गंगा' कहलाती हैं। रोचक बात यह है कि जल-मात्रा की दृष्टि से अलकनंदा बड़ी है, फिर भी धार्मिक परंपरा भागीरथी को मुख्य धारा मानती है। पंच प्रयाग का क्रम — विष्णुप्रयाग, नंदप्रयाग, कर्णप्रयाग, रुद्रप्रयाग और देवप्रयाग — परीक्षा में लगभग निश्चित रूप से आता है। यहाँ का रघुनाथ मंदिर दक्षिण भारतीय स्थापत्य प्रभाव दर्शाता है।
मुख्य तथ्य
| संगम | अलकनंदा + भागीरथी |
| परिणाम | यहाँ से नाम 'गंगा' |
| ज़िला | टिहरी गढ़वाल |
परीक्षा-दृष्टि
- पंच प्रयाग क्रम: विष्णु → नंद → कर्ण → रुद्र → देव
और गहराई से
- भागीरथी को 'गंगा' नाम यहीं मिलता है — जलविज्ञान की दृष्टि से अलकनंदा बड़ी
- रघुनाथ मंदिर — दक्षिण भारतीय शैली का प्रभाव
- निकट नैथाणा — वेधशाला व ज्योतिष परंपरा