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भोटिया दन व ऊन

सीमांत भोटिया समुदाय की ऊन-बुनाई परंपरा, दन और थुलमा जिसकी पहचान हैं।

विस्तार से

सीमांत भोटिया समुदाय की ऊन-बुनाई परंपरा जोहार, दारमा, व्यास और नीति-माणा घाटियों में विकसित हुई। दन और थुलमा जैसे मोटे कालीन तथा पंखी और चुटका इसके प्रमुख उत्पाद हैं, जिनमें तिब्बती भेड़ और स्थानीय पशुओं की ऊन तथा प्राकृतिक रंगों का प्रयोग होता है। 1962 में तिब्बत व्यापार बंद होने से कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित हुई, फिर भी GI टैग और सहकारी प्रयासों से यह शिल्प जीवित है।

मुख्य तथ्य

समुदायभोटिया
उत्पाददन · थुलमा · पंखी
दर्जाGI टैग प्राप्त

परीक्षा-दृष्टि

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