बद्रीनाथ
अलकनंदा तट पर नर-नारायण पर्वतों के बीच विष्णु को समर्पित धाम, बद्री-क्षेत्र का केंद्र।
विस्तार से
अलकनंदा के दाहिने तट पर नर और नारायण पर्वतों के बीच बसा बद्रीनाथ पंच बद्री शृंखला का प्रमुख धाम है। आदि शंकराचार्य द्वारा पुनर्स्थापना की परंपरा इससे जुड़ी है, और यहाँ का मुख्य पुजारी 'रावल' परंपरागत रूप से केरल का नम्बूदरी ब्राह्मण होता है — दक्षिण-उत्तर सांस्कृतिक सेतु का जीवंत उदाहरण। तीन किलोमीटर आगे माणा गाँव भारत का अंतिम गाँव कहलाता है, जहाँ सरस्वती अलकनंदा में मिलती है।
मुख्य तथ्य
| ज़िला | चमोली |
| नदी | अलकनंदा |
| समूह | चार धाम · पंच बद्री |
परीक्षा-दृष्टि
- नर-नारायण पर्वतों के मध्य; आदि शंकराचार्य परंपरा से जुड़ाव
और गहराई से
- पंच बद्री: बद्रीविशाल, योगध्यान, भविष्य, वृद्ध व आदि बद्री
- माणा गाँव — भारत का अंतिम गाँव, यहीं सरस्वती-अलकनंदा संगम (केशव प्रयाग)
- रावल (मुख्य पुजारी) परंपरागत रूप से केरल के नम्बूदरी ब्राह्मण होते हैं