अल्मोड़ा का ताम्र शिल्प
टम्टा शिल्पकारों की ताम्र-पात्र निर्माण की सदियों पुरानी परंपरा।
विस्तार से
अल्मोड़ा का ताम्र शिल्प टम्टा समुदाय की सदियों पुरानी परंपरा है, जिसमें गागर, तौली, फौला तथा अनुष्ठानिक पात्र हाथ से गढ़े जाते हैं। नगर का ताम्र बाज़ार कभी पूरे कुमाऊँ की आपूर्ति करता था। स्टील और एल्युमिनियम की प्रतिस्पर्धा से यह शिल्प संकट में आया, किंतु एक जनपद दो उत्पाद जैसी पहलों के तहत इसे पुनर्जीवित करने का प्रयास हो रहा है — जहाँ मुख्य चुनौती कौशल-हस्तांतरण और बाज़ार-संपर्क की है।
मुख्य तथ्य
| समुदाय | टम्टा शिल्पकार |
| क्षेत्र | अल्मोड़ा |
| उत्पाद | ताम्र पात्र व अनुष्ठान-सामग्री |
परीक्षा-दृष्टि
- परंपरागत धातु-शिल्प — ODOP व GI संदर्भों में उल्लेखनीय
और गहराई से
- टम्टा समुदाय पारंपरिक ताम्रकार; अल्मोड़ा का ताम्र बाज़ार प्रसिद्ध
- गागर, तौली, फौला व अनुष्ठानिक पात्र
- ODOP के अंतर्गत संवर्धन — बाज़ार-संपर्क की चुनौती