वाक्य-शुद्धि व वाक्यांश
**वाक्य-शुद्धि** में लिंग, वचन, कारक और क्रिया के मेल की त्रुटियाँ पकड़नी होती हैं। जैसे — अशुद्ध: 'मैंने वहाँ जाना है।' शुद्ध: 'मुझे वहाँ जाना है।' **अनेक शब्दों के लिए एक शब्द**: जो कभी न मरे — अमर; जिसकी उपमा न हो — अनुपम; जो देखने योग्य हो — दर्शनीय; जिसे जीता न जा सके — अजेय; जो सब कुछ जानता हो — सर्वज्ञ।
वाक्य-शुद्धि — त्रुटि के मुख्य स्रोत
- लिंग-दोष: अशुद्ध: 'मैंने एक अच्छी पुस्तक पढ़ा।' शुद्ध: 'मैंने एक अच्छी पुस्तक पढ़ी।' क्रिया का लिंग कर्म के अनुसार होगा।
- वचन-दोष: अशुद्ध: 'वहाँ अनेक लोग उपस्थित था।' शुद्ध: 'वहाँ अनेक लोग उपस्थित थे।' 'अनेकों', 'सभी लोगों ने' जैसे दोहरे बहुवचन भी अशुद्ध हैं — 'अनेक' स्वयं बहुवचन है।
- कारक-दोष: अशुद्ध: 'वह घर को गया।' शुद्ध: 'वह घर गया।' अशुद्ध: 'मुझे यह पुस्तक चाहिए था।' शुद्ध: 'मुझे यह पुस्तक चाहिए थी।'
- पुनरुक्ति-दोष: अशुद्ध: 'कृपया आप अपनी राय दें।' में दोष नहीं, किंतु 'पुनः दोबारा', 'सिर्फ़ केवल', 'अपनी आत्मकथा', 'निरपराध बेगुनाह' पुनरुक्ति हैं। एक ही अर्थ के दो शब्द साथ न आएँ।
- क्रम-दोष: हिंदी का सामान्य क्रम कर्ता–कर्म–क्रिया है। विशेषण अपने विशेष्य से पहले आता है; क्रियाविशेषण क्रिया के निकट रहता है।
वाक्यांश के लिए एक शब्द — बहु-पूछे
- जो कहा न जा सके — अकथनीय; जिसका कोई शत्रु न हो — अजातशत्रु; जो कभी न मरे — अमर; जिसकी थाह न हो — अथाह; जो सब कुछ जानता हो — सर्वज्ञ; जो थोड़ा जानता हो — अल्पज्ञ।
- जिसका जन्म पहले हुआ हो — अग्रज; बाद में — अनुज; जो पढ़ा-लिखा न हो — निरक्षर; जो आँखों के सामने हो — प्रत्यक्ष; जो आँखों से ओझल हो — परोक्ष; जो सदा रहे — शाश्वत।
- जिसकी उपमा न हो — अनुपम; जो उपकार को माने — कृतज्ञ; जो भूल जाए — कृतघ्न; जिसे जीता न जा सके — अजेय; जो सबका प्रिय हो — सर्वप्रिय; जो नया आया हो — नवागंतुक; जो दूसरों पर निर्भर हो — पराश्रित।
परीक्षा-रणनीति
- वाक्य-शुद्धि के प्रश्न में पहले क्रिया देखें, फिर कर्ता से उसका लिंग-वचन मिलाएँ — अधिकांश त्रुटियाँ यहीं पकड़ी जाती हैं। उसके बाद कारक-चिह्न तथा पुनरुक्ति जाँचें।
- एक-शब्द प्रश्नों में विकल्प प्रायः निकट-अर्थी होते हैं (अल्पज्ञ / अज्ञ / सर्वज्ञ)। परिभाषा के सटीक शब्द पर ध्यान दें — 'थोड़ा जानने वाला' और 'न जानने वाला' अलग हैं।
विगत वर्ष प्रश्न
अभ्यास प्रश्न
1. 'जिसका कोई शत्रु न हो' — के लिए एक शब्द है:
- अजातशत्रु
- अजेय
- अनुपम
- निर्भय
उत्तर: अजातशत्रु
अजातशत्रु = जिसका शत्रु उत्पन्न ही न हुआ हो; अजेय का अर्थ 'जिसे जीता न जा सके' है।
2. शुद्ध वाक्य कौन-सा है?
- मैंने एक अच्छी पुस्तक पढ़ी।
- मैंने एक अच्छी पुस्तक पढ़ा।
- मैंने एक अच्छा पुस्तक पढ़ी।
- मैं एक अच्छी पुस्तक पढ़ा।
उत्तर: मैंने एक अच्छी पुस्तक पढ़ी।
'पुस्तक' स्त्रीलिंग है, अतः विशेषण 'अच्छी' तथा क्रिया 'पढ़ी' दोनों स्त्रीलिंग होंगी।
3. 'जो आँखों से ओझल हो' — के लिए एक शब्द:
- परोक्ष
- प्रत्यक्ष
- अदृश्य
- गुप्त
उत्तर: परोक्ष
परोक्ष = आँखों से ओझल; इसका विलोम प्रत्यक्ष है।
4. 'अनेकों लोग वहाँ उपस्थित थे' — इस वाक्य में कौन-सा दोष है?
- वचन-दोष, 'अनेक' स्वयं बहुवचन है
- लिंग-दोष
- कारक-दोष
- कोई दोष नहीं
उत्तर: वचन-दोष, 'अनेक' स्वयं बहुवचन है
'अनेक' पहले से बहुवचन है, अतः 'अनेकों' दोहरा बहुवचन बनकर अशुद्ध हो जाता है।
5. 'जो थोड़ा जानता हो' — के लिए उपयुक्त शब्द:
- अल्पज्ञ
- सर्वज्ञ
- अज्ञ
- बहुज्ञ
उत्तर: अल्पज्ञ
अल्पज्ञ = थोड़ा जानने वाला; अज्ञ = न जानने वाला; सर्वज्ञ = सब जानने वाला।
6. वाक्य-शुद्धि के प्रश्न में सबसे पहले क्या जाँचना चाहिए?
- क्रिया का कर्ता से लिंग-वचन मेल
- वाक्य की लंबाई
- विशेषण की संख्या
- विराम-चिह्न
उत्तर: क्रिया का कर्ता से लिंग-वचन मेल
अधिकांश त्रुटियाँ क्रिया के लिंग-वचन मेल में होती हैं; यही सबसे तेज़ जाँच है।