उत्तराखंड शासन — राज्यपाल, विधानसभा व मुख्यमंत्री
उत्तराखंड में एकसदनीय विधायिका है — 70 निर्वाचित सदस्यों की विधानसभा। राज्य में 5 लोकसभा तथा 3 राज्यसभा सीटें हैं। यह खंड UKPCS व UKSSSC दोनों में सीधे अंक देता है।
विधानसभा
- कुल 70 निर्वाचित सीटें; इनमें 13 अनुसूचित जाति तथा 2 अनुसूचित जनजाति (चकराता व खटीमा) हेतु आरक्षित। एंग्लो-इंडियन मनोनयन 104वें संविधान संशोधन (2019) के बाद समाप्त हो चुका है।
- अंतरिम विधानसभा (2000-2002) में उत्तर प्रदेश से आए 30 सदस्य थे; प्रथम निर्वाचित विधानसभा 2002 में गठित हुई। भराड़ीसैंण (गैरसैंण) में विधानसभा भवन बना है और यहाँ सत्र आयोजित होते हैं।
- राज्य की 5 लोकसभा सीटें — टिहरी गढ़वाल, गढ़वाल, अल्मोड़ा (अ.जा. आरक्षित), नैनीताल-ऊधम सिंह नगर तथा हरिद्वार। राज्यसभा की 3 सीटें विधानसभा सदस्यों द्वारा एकल संक्रमणीय मत से भरी जाती हैं।
राज्यपाल
- अनुच्छेद 153 — प्रत्येक राज्य का एक राज्यपाल; नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा, कार्यकाल 5 वर्ष किंतु राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत। न्यूनतम आयु 35 वर्ष तथा भारत का नागरिक होना आवश्यक।
- राज्यपाल विधानमंडल का अभिन्न अंग है; अनुच्छेद 213 के अंतर्गत अध्यादेश जारी कर सकता है तथा अनुच्छेद 161 के अंतर्गत क्षमादान की शक्ति रखता है (मृत्युदंड क्षमा नहीं कर सकता — यह राष्ट्रपति का विशेषाधिकार है)।
मुख्यमंत्री व मंत्रिपरिषद
- अनुच्छेद 164 — मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा, अन्य मंत्री मुख्यमंत्री की सलाह पर। मंत्रिपरिषद विधानसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी।
- 91वें संविधान संशोधन के अनुसार राज्य मंत्रिपरिषद का आकार विधानसभा सदस्य संख्या के 15% से अधिक नहीं, किंतु किसी भी राज्य में न्यूनतम 12 मंत्री हो सकते हैं। उत्तराखंड में 70 सदस्यों के आधार पर यह सीमा 12 है (15% = 10.5, अतः न्यूनतम 12 लागू)।
- नित्यानंद स्वामी राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री तथा सुरजीत सिंह बरनाला प्रथम राज्यपाल थे।
पंचायती राज व नगरीय निकाय
- उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायती राज — ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत। हरिद्वार जनपद की पंचायतें उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम के अंतर्गत चलती रहीं, जबकि शेष 12 जनपदों पर उत्तराखंड पंचायतीराज अधिनियम लागू है — यह विसंगति परीक्षा में पूछी जाती है।
- राज्य ने पंचायतों में महिलाओं हेतु 50% आरक्षण लागू किया है। दो-संतान नियम तथा न्यूनतम शैक्षिक अर्हता जैसी शर्तें भी समय-समय पर जोड़ी गई हैं।
- नगरीय निकाय तीन प्रकार के — नगर निगम, नगर पालिका परिषद तथा नगर पंचायत। देहरादून राज्य का प्रथम नगर निगम है; बाद में हरिद्वार, हल्द्वानी, काशीपुर, रुद्रपुर, ऋषिकेश, कोटद्वार, रुड़की, पिथौरागढ़ व अल्मोड़ा को भी नगर निगम का दर्जा मिला।
राज्य के संवैधानिक व वैधानिक निकाय
- उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की स्थापना 15 मई 2001 को; मुख्यालय गुरुकुल कांगड़ी, हरिद्वार। आयोग अपना वार्षिक प्रतिवेदन राज्यपाल को प्रस्तुत करता है, जो उसे विधानमंडल के समक्ष रखवाते हैं।
- अन्य प्रमुख निकाय — उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC), राज्य निर्वाचन आयोग (स्थानीय निकाय चुनाव हेतु), राज्य सूचना आयोग, राज्य महिला आयोग तथा उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग।
- स्मरण रखें — राज्य निर्वाचन आयोग स्थानीय निकायों के चुनाव कराता है, जबकि विधानसभा व लोकसभा चुनाव भारत निर्वाचन आयोग कराता है। यह विभाजन नियमित रूप से पूछा जाता है।
विगत वर्ष प्रश्न
उत्तराखंड विधानसभा में कुल कितनी निर्वाचित सीटें हैं? (प्रीलिम्स शैली)
अभ्यास प्रश्न
1. उत्तराखंड विधानसभा में अनुसूचित जाति हेतु कितनी सीटें आरक्षित हैं?
- 13
- 2
- 10
- 15
उत्तर: 13
70 में से 13 अ.जा. तथा 2 अ.ज.जा. हेतु आरक्षित हैं।
2. उत्तराखंड के प्रथम मुख्यमंत्री कौन थे?
- नित्यानंद स्वामी
- भगत सिंह कोश्यारी
- नारायण दत्त तिवारी
- सुरजीत सिंह बरनाला
उत्तर: नित्यानंद स्वामी
नित्यानंद स्वामी प्रथम मुख्यमंत्री; सुरजीत सिंह बरनाला प्रथम राज्यपाल थे।
3. राज्यपाल को अध्यादेश जारी करने की शक्ति किस अनुच्छेद से मिलती है?
- अनुच्छेद 213
- अनुच्छेद 123
- अनुच्छेद 161
- अनुच्छेद 164
उत्तर: अनुच्छेद 213
अनुच्छेद 213; अनुच्छेद 123 राष्ट्रपति के लिए है।
4. उत्तराखंड की राज्यसभा सीटों की संख्या कितनी है?
- 3
- 5
- 4
- 2
उत्तर: 3
3 राज्यसभा तथा 5 लोकसभा सीटें।
5. राज्यपाल की क्षमादान शक्ति के संबंध में कौन-सा कथन सही है?
- वह मृत्युदंड क्षमा नहीं कर सकता
- वह मृत्युदंड क्षमा कर सकता है
- उसे क्षमादान की कोई शक्ति नहीं
- केवल आपातकाल में शक्ति है
उत्तर: वह मृत्युदंड क्षमा नहीं कर सकता
अनुच्छेद 161 के अंतर्गत क्षमादान की शक्ति है, किंतु मृत्युदंड क्षमा करना राष्ट्रपति का विशेषाधिकार है।
6. उत्तराखंड लोक सेवा आयोग का मुख्यालय कहाँ है?
- गुरुकुल कांगड़ी, हरिद्वार
- देहरादून
- नैनीताल
- हल्द्वानी
उत्तर: गुरुकुल कांगड़ी, हरिद्वार
15 मई 2001 को गठित; मुख्यालय गुरुकुल कांगड़ी, हरिद्वार में है।
7. स्थानीय निकायों के चुनाव कौन कराता है?
- राज्य निर्वाचन आयोग
- भारत निर्वाचन आयोग
- राज्यपाल
- जिलाधिकारी
उत्तर: राज्य निर्वाचन आयोग
स्थानीय निकाय चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग तथा विधानसभा-लोकसभा चुनाव भारत निर्वाचन आयोग कराता है।
8. उत्तराखंड का प्रथम नगर निगम कौन-सा है?
- देहरादून
- हरिद्वार
- हल्द्वानी
- रुड़की
उत्तर: देहरादून
देहरादून राज्य का प्रथम नगर निगम है; बाद में अन्य नगरों को यह दर्जा मिला।