उत्तराखंड में पंचायती राज
73वें संविधान संशोधन ने त्रिस्तरीय पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा दिया। पर्वतीय भूगोल के कारण उत्तराखंड में इसका क्रियान्वयन अलग चुनौतियाँ रखता है।
73वाँ संशोधन
- 1992 (लागू 1993) — पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा; भाग IX; ग्यारहवीं अनुसूची (29 विषय)।
- आधार — बलवंत राय मेहता समिति (त्रि-स्तर, 1957) व अशोक मेहता समिति (द्वि-स्तर, 1978)।
त्रि-स्तरीय ढाँचा
| स्तर | इकाई |
|---|---|
| ग्राम | ग्राम पंचायत (आधार — ग्राम सभा) |
| मध्यवर्ती | क्षेत्र/पंचायत समिति |
| जिला | जिला पंचायत/परिषद |
मुख्य प्रावधान
- 5-वर्षीय कार्यकाल; भंग होने पर 6 माह में चुनाव; राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कराता है; राज्य वित्त आयोग (अनु. 243-I)।
- आरक्षण: SC/ST जनसंख्यानुपात; महिलाओं हेतु न्यूनतम 1/3 (उत्तराखंड सहित कई राज्यों में 50%)।
74वाँ संशोधन
- 1992 — नगरीय स्थानीय निकाय; भाग IXA; बारहवीं अनुसूची (18 विषय); नगर पंचायत/नगरपालिका/नगर निगम।
उत्तराखंड कोण
- राज्य में त्रि-स्तरीय पंचायती राज; महिला आरक्षण 50%; ग्राम प्रधान की सशक्त परंपरा — चंद-काल के मुखिया से जुड़ी।
परीक्षा-सूत्र
- 73वाँ 1992/भाग IX/11वीं अनु. (29); 74वाँ/IXA/12वीं (18); मेहता समितियाँ; SEC; महिला 1/3-50%।
विगत वर्ष प्रश्न
पंचायती राज को किस संशोधन से दर्जा मिला? (प्रीलिम्स 2015)
अभ्यास प्रश्न
1. त्रिस्तरीय पंचायती राज किस संविधान संशोधन से संबंधित है?
- 73वाँ
- 74वाँ
- 42वाँ
- 44वाँ
उत्तर: 73वाँ
73वाँ संशोधन ग्रामीण स्थानीय शासन से संबंधित है।