उत्तराखंड की जनजातियाँ व अनुसूचित वर्ग
राज्य में 1967 से पाँच जनजातियाँ अनुसूचित हैं — थारू, जौनसारी, बुक्सा, भोटिया व राजी। जनगणना 2011 के अनुसार अनुसूचित जाति 18.8% तथा अनुसूचित जनजाति 2.9% है।
आँकड़े — एक दृष्टि में
- अनुसूचित जाति 18,92,516 (18.8%), लिंगानुपात 936, साक्षरता 74.4%; अनुसूचित जनजाति 2,91,903 (2.9%), लिंगानुपात 963, साक्षरता 73.9%।
- जनसंख्या क्रम: थारू (91,342) > जौनसारी (88,664) > बुक्सा (54,037) > भोटिया (39,106) > राजी (690)। थारू सबसे बड़ी तथा राजी सबसे छोटी जनजाति है।
- सर्वाधिक ST जनसंख्या — ऊधम सिंह नगर; न्यूनतम — रुद्रप्रयाग (386)। सर्वाधिक ST प्रतिशत ऊधम सिंह नगर (7.46%), न्यूनतम टिहरी (0.14%)। सर्वाधिक SC जनसंख्या हरिद्वार, न्यूनतम चंपावत; सर्वाधिक SC प्रतिशत बागेश्वर (27.73%), न्यूनतम देहरादून (13.49%)।
- आरक्षण — 5 लोकसभा सीटों में एक (अल्मोड़ा) SC हेतु आरक्षित; ST हेतु कोई लोकसभा सीट आरक्षित नहीं। 70 विधानसभा सीटों में 13 SC तथा 2 ST (चकराता व खटीमा) हेतु आरक्षित।
थारू
- ऊधम सिंह नगर के खटीमा, किच्छा, नानकमत्ता व सितारगंज के लगभग 141 गाँवों में; राज्य की सबसे बड़ी जनजाति। स्वयं को राजस्थान के राजपूत वंशजों से जोड़ते हैं, किंतु शारीरिक लक्षण मंगोलॉयड-सदृश हैं।
- परिवार में मातृसत्तात्मक प्रभाव प्रबल; विवाह-तय की प्रथा 'अपना-पराया', तिथि तय होने पर 'बात कट्टी'; विधवा-विवाह मान्य, इसका भोज 'लठभरवा भोज' कहलाता है। मुख्य भोजन चावल व मछली, चावल से बनी मदिरा 'जाड़'।
जौनसारी व भोटिया
- जौनसारी: राज्य की दूसरी सबसे बड़ी किंतु गढ़वाल मंडल की सबसे बड़ी जनजाति; देहरादून की चकराता, कालसी व त्यूणी तहसीलों का जौनसार-बावर क्षेत्र — 39 खत तथा 358 राजस्व गाँव। पारंपरिक पंचायत 'खुमरी', मुखिया 'ग्राम सयाणा'; कई गाँवों की 'खत खुमरी' का मुखिया 'खत सयाणा'।
- जौनसारी आराध्य महासू देवता, प्रमुख स्थल हनोल; स्वयं को पांडवों का वंशज मानते हैं। मुख्य दीपावली के ठीक एक माह बाद 'बूढ़ी दीपावली' मनाते हैं। विवाहित पुत्री ससुराल में 'र्यांती' तथा मायके में 'ध्यांती' कहलाती है।
- भोटिया: उच्च हिमालयी लगभग 291 गाँवों में ऋतु-प्रवास करने वाली मंगोलॉयड-मूल जनजाति; उत्तरकाशी में 'जाड़', चमोली में 'तोल्छा' व 'मारछा', पिथौरागढ़ में 'जोहारी', 'दारमिया', 'चौदांसी'। ग्रीष्म-आवास 'मैत', शीत-आवास 'गूंठा/मुन्सा'।
- भोटिया भाषा तिब्बती-बर्मी परिवार की; युवा-संगठन 'रं-बंग'; कंडाली पर्व प्रति 12 वर्ष तथा लोसर मनाया जाता है। भारत-तिब्बत व्यापार, ऊन-बुनाई व दन-कालीन इनकी पहचान रही है।
बुक्सा व राजी
- बुक्सा (बोक्सा) — तराई-भाबर क्षेत्र, ऊधम सिंह नगर के बाजपुर, गदरपुर व काशीपुर तथा नैनीताल, पौड़ी व देहरादून (विकासनगर, डोईवाला) के भाग। 1305 ई. में धारानगरी से आए जगतदेव के राजपूत वंश से स्वयं को जोड़ते हैं। आराध्य बालासुंदरी, मुख्य मंदिर काशीपुर। स्थानीय शासन-निकाय 'तख्त', मुखिया 'मुंसिफ़' या 'दरोगा'।
- राजी (वन रावत) — पिथौरागढ़ के डीडीहाट, धारचूला व कनाली छीना विकासखंडों में, कुछ चंपावत व नैनीताल में; 2011 में लगभग 690 जनसंख्या के साथ राज्य की सबसे छोटी जनजाति। भाषा में तिब्बती-बर्मी व संस्कृत दोनों के तत्व; काष्ठ-शिल्प में दक्ष।
विगत वर्ष प्रश्न
उत्तराखंड की सबसे छोटी अनुसूचित जनजाति कौन-सी है? (प्रीलिम्स 2017 शैली)
अभ्यास प्रश्न
1. उत्तराखंड की सबसे बड़ी जनजाति कौन-सी है?
- थारू
- जौनसारी
- भोटिया
- बुक्सा
उत्तर: थारू
थारू (91,342) सबसे बड़ी; जौनसारी (88,664) दूसरी सबसे बड़ी किंतु गढ़वाल मंडल की सबसे बड़ी है।
2. 'खुमरी' पारंपरिक पंचायत किस जनजाति से संबंधित है?
- जौनसारी
- थारू
- बुक्सा
- राजी
उत्तर: जौनसारी
जौनसार-बावर की पारंपरिक पंचायत 'खुमरी' है, जिसका मुखिया ग्राम सयाणा होता है।
3. थारू जनजाति में विवाह-तय की प्रथा को क्या कहते हैं?
- अपना-पराया
- बात कट्टी
- लठभरवा
- दमोला
उत्तर: अपना-पराया
विवाह तय करना 'अपना-पराया'; तिथि तय होने पर 'बात कट्टी' कहलाता है।
4. ऋतु-प्रवास (seasonal migration) किस जनजाति की विशेषता है?
- भोटिया
- थारू
- बुक्सा
- राजी
उत्तर: भोटिया
भोटिया ग्रीष्म में 'मैत' तथा शीत में 'गूंठा/मुन्सा' आवासों के बीच प्रवास करते हैं।
5. उत्तराखंड विधानसभा में अनुसूचित जनजाति हेतु आरक्षित सीटें कौन-सी हैं?
- चकराता व खटीमा
- पुरोला व घनसाली
- थराली व सोमेश्वर
- बाजपुर व ज्वालापुर
उत्तर: चकराता व खटीमा
70 में से 2 सीटें ST हेतु — चकराता (देहरादून) व खटीमा (ऊधम सिंह नगर)।
6. बुक्सा जनजाति के शासन-निकाय का मुखिया कौन होता है?
- मुंसिफ़ या दरोगा
- ग्राम सयाणा
- जगरिया
- खत सयाणा
उत्तर: मुंसिफ़ या दरोगा
बुक्सा का स्थानीय निकाय 'तख्त' है, जिसका मुखिया मुंसिफ़ या दरोगा कहलाता है।
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