उत्तराखंड की भाषा, बोली व साहित्य
कुमाऊँनी व गढ़वाली मध्य पहाड़ी वर्ग की बोलियाँ हैं, जिनकी लिपि देवनागरी है। हिंदी राज्य की प्रथम राजभाषा (जनवरी 2000) तथा संस्कृत द्वितीय राजभाषा (जनवरी 2010) है।
कुमाऊँनी — उद्भव व उपबोलियाँ
- उद्भव पर दो मत — डॉ. ग्रियर्सन, डॉ. सुनीति कुमार चटर्जी व डी.डी. शर्मा इसे खस, पैशाची व प्राकृत से जोड़ते हैं; डॉ. नारायण दत्त पालीवाल, उदय नारायण तिवारी, डॉ. धीरेंद्र वर्मा व पं. बद्रीदत्त पांडे शौरसेनी अपभ्रंश से। ध्वनि व वाक्य-संरचना की दृष्टि से यह शौरसेनी अपभ्रंश के निकटतम है।
- 12 उपबोलियाँ: डॉ. त्रिलोचन पांडेय ने कुमाऊँनी को चार वर्गों व 12 उपबोलियों में बाँटा — पूर्वी: कुमैयाँ, सोर्याली, सिराली, अस्कोटी; पश्चिमी: खसपरजिया, पछाई, फल्दाकोटी, चौगर्खिया, गंगोला, दानपुरिया; उत्तरी: जोहारी; दक्षिणी: नैनीताली (रच्छभैंसी)।
गढ़वाली — उद्भव व उपबोलियाँ
- अधिकांश विद्वान इसका उद्भव शौरसेनी अपभ्रंश से मानते हैं; कुछ 'दर्द' या 'खस' से। मैक्समूलर ने 'साइंस ऑफ़ लैंग्वेज' में गढ़वाली को प्राकृतिक भाषा का रूप माना; हरिराम धस्माना ने 'वेदमाला' में गढ़वाली व वैदिक संस्कृत के समान शब्दों की सूची दी।
- डॉ. ग्रियर्सन ने गढ़वाली को 8 उपबोलियों में बाँटा — श्रीनगरी, नागपुरिया, दसौल्या, बधाणी, राठी, माझ कुमैया, सलाणी व टिहरियाली। टिहरी व श्रीनगर के आसपास की बोली मानक गढ़वाली मानी जाती है।
- क्षेत्र की अन्य बोलियाँ — जौनसारी (जौनसार-बावर), भोटिया (चमोली व पिथौरागढ़ के सीमांत), तथा हरिद्वार-रुड़की-देहरादून की खड़ी हिंदी, जिस पर हरियाणवी का प्रभाव है।
भाषा संस्थान
- उत्तराखंड भाषा संस्थान व उत्तराखंड हिंदी अकादमी — दोनों 2009; 2011 में हिंदी अकादमी के साथ डॉ. पीतांबर दत्त बड़थ्वाल का नाम जोड़ा गया। उर्दू अकादमी व पंजाबी अकादमी — 2013; लोक भाषा एवं बोली अकादमी — 2016; भाषा संस्थान अधिनियम — 2018।
- साहित्य गौरव पुरस्कार योजना के अंतर्गत कुमाऊँनी लेखन हेतु 'गुमानी पंत पुरस्कार' 2023 से आरंभ; प्रथम पुरस्कार राजेंद्र सिंह बोरा (त्रिभुवन गिरि) को।
साहित्य व पत्रकारिता
- गढ़वाली में लिखित साहित्य लगभग 1750 ई. से; राजा सुदर्शन शाह (1815-56) व श्याम चंद्र नेगी ने 'गोरखवाणी' लिखी। 1905 में टिहरी से गढ़वाली पत्र आरंभ हुआ।
- बोली-भेद के परीक्षा-सूत्र — कुमाऊँनी में 'स' के स्थान पर 'श' का अधिक प्रयोग तथा अवधी की भाँति बहुवचन में 'न' जोड़ना (लड़का → लड़कन); गढ़वाली में सभी स्वरों के अनुनासिक रूप तथा संख्यावाची विशेषणों में ध्वनि-विशेषता (ग्यारह → अग्यारा, दो → ध्रि)।
विगत वर्ष प्रश्न
गढ़वाली बोली को 8 उपबोलियों में किसने विभाजित किया? (प्रीलिम्स शैली)
अभ्यास प्रश्न
1. कुमाऊँनी को 12 उपबोलियों में किसने विभाजित किया?
- डॉ. त्रिलोचन पांडेय
- डॉ. ग्रियर्सन
- डॉ. धीरेंद्र वर्मा
- मैक्समूलर
उत्तर: डॉ. त्रिलोचन पांडेय
डॉ. त्रिलोचन पांडेय ने चार वर्ग व 12 उपबोलियाँ निर्धारित कीं; ग्रियर्सन ने गढ़वाली को 8 में बाँटा।
2. उत्तराखंड की द्वितीय राजभाषा कौन-सी है और कब घोषित हुई?
- संस्कृत — जनवरी 2010
- उर्दू — 2013
- गढ़वाली — 2016
- कुमाऊँनी — 2009
उत्तर: संस्कृत — जनवरी 2010
हिंदी प्रथम (जनवरी 2000) तथा संस्कृत द्वितीय राजभाषा (जनवरी 2010) है।
3. 'जोहारी' किस बोली-वर्ग की उपबोली है?
- उत्तरी कुमाऊँनी
- पश्चिमी कुमाऊँनी
- गढ़वाली
- जौनसारी
उत्तर: उत्तरी कुमाऊँनी
जोहारी उत्तरी कुमाऊँनी वर्ग की उपबोली है, जिस पर तिब्बती का प्रभाव है।
4. कुमाऊँनी भाषा हेतु 'गुमानी पंत पुरस्कार' किस वर्ष से आरंभ हुआ?
- 2023
- 2016
- 2009
- 2018
उत्तर: 2023
साहित्य गौरव पुरस्कार योजना के अंतर्गत 2023 से; प्रथम पुरस्कार राजेंद्र सिंह बोरा को।
5. उत्तराखंड भाषा संस्थान की स्थापना किस वर्ष हुई?
- 2009
- 2013
- 2016
- 2018
उत्तर: 2009
भाषा संस्थान व हिंदी अकादमी दोनों 2009 में; भाषा संस्थान अधिनियम 2018 में आया।
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