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उत्तराखंड की भाषा, बोली व साहित्य

कुमाऊँनी व गढ़वाली मध्य पहाड़ी वर्ग की बोलियाँ हैं, जिनकी लिपि देवनागरी है। हिंदी राज्य की प्रथम राजभाषा (जनवरी 2000) तथा संस्कृत द्वितीय राजभाषा (जनवरी 2010) है।

कुमाऊँनी — उद्भव व उपबोलियाँ

गढ़वाली — उद्भव व उपबोलियाँ

भाषा संस्थान

साहित्य व पत्रकारिता

विगत वर्ष प्रश्न

गढ़वाली बोली को 8 उपबोलियों में किसने विभाजित किया? (प्रीलिम्स शैली)

अभ्यास प्रश्न

1. कुमाऊँनी को 12 उपबोलियों में किसने विभाजित किया?

  1. डॉ. त्रिलोचन पांडेय
  2. डॉ. ग्रियर्सन
  3. डॉ. धीरेंद्र वर्मा
  4. मैक्समूलर
उत्तर: डॉ. त्रिलोचन पांडेय
डॉ. त्रिलोचन पांडेय ने चार वर्ग व 12 उपबोलियाँ निर्धारित कीं; ग्रियर्सन ने गढ़वाली को 8 में बाँटा।

2. उत्तराखंड की द्वितीय राजभाषा कौन-सी है और कब घोषित हुई?

  1. संस्कृत — जनवरी 2010
  2. उर्दू — 2013
  3. गढ़वाली — 2016
  4. कुमाऊँनी — 2009
उत्तर: संस्कृत — जनवरी 2010
हिंदी प्रथम (जनवरी 2000) तथा संस्कृत द्वितीय राजभाषा (जनवरी 2010) है।

3. 'जोहारी' किस बोली-वर्ग की उपबोली है?

  1. उत्तरी कुमाऊँनी
  2. पश्चिमी कुमाऊँनी
  3. गढ़वाली
  4. जौनसारी
उत्तर: उत्तरी कुमाऊँनी
जोहारी उत्तरी कुमाऊँनी वर्ग की उपबोली है, जिस पर तिब्बती का प्रभाव है।

4. कुमाऊँनी भाषा हेतु 'गुमानी पंत पुरस्कार' किस वर्ष से आरंभ हुआ?

  1. 2023
  2. 2016
  3. 2009
  4. 2018
उत्तर: 2023
साहित्य गौरव पुरस्कार योजना के अंतर्गत 2023 से; प्रथम पुरस्कार राजेंद्र सिंह बोरा को।

5. उत्तराखंड भाषा संस्थान की स्थापना किस वर्ष हुई?

  1. 2009
  2. 2013
  3. 2016
  4. 2018
उत्तर: 2009
भाषा संस्थान व हिंदी अकादमी दोनों 2009 में; भाषा संस्थान अधिनियम 2018 में आया।

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