उत्तराखंड के पर्व, मेले व महोत्सव
उत्तराखंड के पर्व कृषि-चक्र, ऋतु-परिवर्तन व स्थानीय देवताओं से जुड़े हैं। परीक्षा में प्रायः 'कौन-सा मेला किस जनपद में' के रूप में मिलान-प्रश्न आते हैं, इसलिए पर्व–स्थान जोड़ी याद रखना निर्णायक है।
प्रमुख पर्व
- हरेला: वर्ष में तीन बार (चैत्र, श्रावण, आश्विन); श्रावण का हरेला सर्वाधिक प्रसिद्ध — हरियाली व वृक्षारोपण का पर्व।
- घी संक्रांति (ओलगिया) — सितंबर; मकर संक्रांति (घुघुतिया) — जनवरी, आटे के घुघुत कौओं को खिलाए जाते हैं; फूलदेई (फूलगस्त) — चैत्र के पहले दिन बच्चों का वसंत पर्व; बिखौती — बैसाख में।
- खतड़ुआ — आश्विन में पशु-रोग निवारण का कुमाऊँनी पर्व; आंठू — भाद्रपद में गौरा-महेश्वर पूजन; जागड़ा — महासू देवता का पर्व; नुणाई — जौनसार-बावर में श्रावण में। थारू जनजाति दीपावली को शोक-दिवस के रूप में मनाती है।
प्रसिद्ध मेले — जनपद सहित
- नंदादेवी मेला — अल्मोड़ा, नैनीताल, मिलम, कोट, बागेश्वर; उत्तरायणी (घुघुतिया) मेला — बागेश्वर, मकर संक्रांति पर; 1921 में यहीं कुली बेगार प्रथा का अंत हुआ।
- देवीधुरा (बगवाल) मेला — चंपावत, वाराही देवी मंदिर, श्रावण पूर्णिमा, पाषाण-युद्ध हेतु प्रसिद्ध; पूर्णागिरि मेला — चंपावत, चैत्र नवरात्रि; स्याल्दे-बिखौती — द्वाराहाट (अल्मोड़ा); गणनाथ मेला — अल्मोड़ा, कार्तिक पूर्णिमा।
- थल मेला — पिथौरागढ़, बालेश्वर मंदिर, बैसाख; जौलजीबी मेला — पिथौरागढ़, काली व गोरी नदियों के संगम पर; जागड़ा मेला हनोल — देहरादून, 2022 में 'राज्य मेला' घोषित; झंडा मेला — देहरादून, गुरु राम राय दरबार साहिब।
- कुंभ — हरिद्वार, प्रति 12 वर्ष; अर्धकुंभ — प्रति 6 वर्ष; पिरान कलियर उर्स — रुड़की (हरिद्वार); चैती (बाला सुंदरी) मेला — काशीपुर (ऊधम सिंह नगर); बैकुंठ चतुर्दशी मेला — कमलेश्वर मंदिर, श्रीनगर (पौड़ी); क्रांति दिवस मेला — पीठसैंण (पौड़ी), 23 अप्रैल।
विशिष्ट परंपराएँ
- हिलजात्रा — पिथौरागढ़ का कृषि-पर्व, गोरखाओं द्वारा प्रवर्तित; 'लाखिया भूत' इसका मुख्य पात्र। रम्माण — जोशीमठ (चमोली) का मुखौटा नृत्य-नाट्य, यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में।
- बिस्सू मेला — जौनसार-बावर, बैसाख में करतब व तीरंदाजी; गिंदी का कौथिग — पौड़ी गढ़वाल, बसंत पंचमी का पारंपरिक खेल; वीर केसरी मेला — 3 मई, चोलिथात, शहीद वीर केसरी चंद की स्मृति में।
विगत वर्ष प्रश्न
बगवाल (पाषाण-युद्ध) किस मंदिर में आयोजित होता है? (प्रीलिम्स शैली)
अभ्यास प्रश्न
1. देवीधुरा की प्रसिद्ध बगवाल किस जनपद में होती है?
- चंपावत
- अल्मोड़ा
- बागेश्वर
- पिथौरागढ़
उत्तर: चंपावत
वाराही देवी मंदिर, देवीधुरा (चंपावत) में श्रावण पूर्णिमा पर।
2. जौलजीबी मेला किन दो नदियों के संगम पर लगता है?
- काली व गोरी
- अलकनंदा व भागीरथी
- पिंडर व अलकनंदा
- कोसी व सुयाल
उत्तर: काली व गोरी
पिथौरागढ़ में काली तथा गोरी नदियों के संगम पर।
3. हिलजात्रा पर्व का मुख्य पात्र कौन है?
- लाखिया भूत
- महासू देवता
- गोलू देवता
- नंदा
उत्तर: लाखिया भूत
पिथौरागढ़ की हिलजात्रा में 'लाखिया भूत' प्रमुख पात्र होता है।
4. उत्तरायणी मेला किस जनपद से संबंधित है, जहाँ 1921 में कुली बेगार समाप्त हुई?
- बागेश्वर
- अल्मोड़ा
- नैनीताल
- चमोली
उत्तर: बागेश्वर
बागेश्वर में मकर संक्रांति पर; 1921 में यहीं कुली बेगार प्रथा समाप्त की गई।
5. हरेला वर्ष में कितनी बार मनाया जाता है?
- तीन बार
- एक बार
- दो बार
- चार बार
उत्तर: तीन बार
चैत्र, श्रावण व आश्विन — तीन बार; श्रावण का हरेला सर्वाधिक प्रसिद्ध है।
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