उत्तराखंड के ऊर्जा संसाधन व नीतियाँ
कोयला व पेट्रोलियम की कमी के बावजूद जल-संसाधनों के कारण राज्य में जल-विद्युत की अपार संभावना है — अनुमानतः लगभग 40,000 मेगावाट। राज्य को अन्य एजेंसियों की परियोजनाओं से 12% निःशुल्क बिजली रॉयल्टी के रूप में मिलती है।
स्थापित क्षमता
- केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की मार्च 2025 रिपोर्ट के अनुसार फरवरी 2025 तक कुल स्थापित क्षमता 4,517.76 मेगावाट — जल-विद्युत 2,155.89, तापीय 1,361.50, नवीकरणीय 969.13 तथा नाभिकीय 31.24 मेगावाट।
- क्षेत्रवार — निजी क्षेत्र 1,892.96 मेगावाट (41.90%), राज्य सरकार 1,459.52 (32.08%), केंद्र सरकार 1,165.28 (25.79%)। 2023-24 में राज्य की अनुमानित पीक माँग 2,635 मेगावाट रही; खपत उत्पादन से अधिक होने के कारण बाहर से बिजली खरीदनी पड़ती है।
- अनुमानित 40,000 मेगावाट संभावना में से लगभग 25,000 मेगावाट की परियोजनाएँ चिह्नित; 12,716 मेगावाट क्षमता की 59 परियोजनाओं पर निर्माण आरंभ हुआ, यद्यपि पर्यावरणीय चिंताओं से कुछ रुकी हुई हैं।
प्रमुख नीतियाँ
- नवीकरणीय ऊर्जा नीति 2008: 29 जनवरी 2008 को घोषित; 25 मेगावाट तक की परियोजनाएँ स्थानीय लोगों को आवंटित; 5 मेगावाट तक की परियोजनाओं पर 15 वर्ष तक कोई रॉयल्टी नहीं, उसके बाद 18%। प्रीमियम ₹5 लाख प्रति मेगावाट से घटाकर ₹5,000 प्रति आवेदन किया गया।
- पिरूल नीति 2018: 3 अगस्त 2018 से लागू; चीड़ वन राज्य के वन क्षेत्र का 16.36% (लगभग 4 लाख हेक्टेयर) घेरते हैं और वार्षिक लगभग 23 लाख मीट्रिक टन पिरूल देते हैं। लक्ष्य — 2030 तक पिरूल से 100 मेगावाट; अब तक 6 संयंत्र स्थापित। वनाग्नि रोकने हेतु 'पिरूल लाओ-पैसे पाओ' अभियान मई 2024 में रुद्रप्रयाग से आरंभ।
- सौर ऊर्जा नीति 2023: मार्च 2023 में स्वीकृत; जनवरी 2025 तक उपलब्धि 593.07 मेगावाट, 2027 तक लक्ष्य 2,500 मेगावाट। सरकारी या पट्टे की भूमि पर लगी परियोजनाओं में स्थानीय युवाओं को 70% रोज़गार; UREDA को भूमि बैंक के रूप में अधिसूचित किया गया।
- राज्य ऊर्जा नीति में 25 मेगावाट तक की परियोजनाएँ 'लघु' तथा उससे अधिक 'वृहद' मानी जाती हैं; रुड़की, किच्छा व पिथौरागढ़ में तीन नए सब-स्टेशन प्रस्तावित किए गए।
प्रमुख जल-विद्युत परियोजनाएँ
- टिहरी बाँध — भागीरथी व भिलंगना के संगम पर, ऊँचाई लगभग 260.5 मीटर, भारत का सर्वोच्च तथा विश्व के सर्वोच्च बाँधों में से एक; टिहरी जलविद्युत परिसर की कुल क्षमता 2,400 मेगावाट प्रस्तावित है, जिसमें पंप-भंडारण संयंत्र भी सम्मिलित है।
- अन्य प्रमुख — धौलीगंगा (पिथौरागढ़, 280 मेगावाट), टनकपुर व धौलीगंगा NHPC के अधीन, मनेरी-भाली (भागीरथी, उत्तरकाशी), कोटेश्वर (टिहरी के नीचे), विष्णुप्रयाग (अलकनंदा), श्रीनगर जलविद्युत परियोजना (अलकनंदा)।
- राज्य की प्रथम जल-विद्युत परियोजना ग्लोगी (मसूरी के निकट) थी, जो 1907 में आरंभ हुई — यह एशिया की आरंभिक परियोजनाओं में गिनी जाती है।
संस्थागत ढाँचा
- 2001 में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद के विभाजन से तीन निगम बने — UPCL (वितरण), UJVNL (उत्पादन) तथा PTCUL (पारेषण)। नियामक कार्य उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) करता है, जिसका गठन 2002 में हुआ।
- अक्षय ऊर्जा का कार्य उत्तराखंड नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (UREDA) देखता है। सौर, लघु जल-विद्युत, पिरूल तथा बायोमास इसके प्रमुख कार्यक्षेत्र हैं।
विगत वर्ष प्रश्न
पिरूल आधारित ऊर्जा नीति कब लागू हुई? (प्रीलिम्स शैली)
अभ्यास प्रश्न
1. अन्य एजेंसियों की परियोजनाओं से राज्य को कितनी निःशुल्क बिजली रॉयल्टी मिलती है?
- 12%
- 18%
- 10%
- 15%
उत्तर: 12%
अन्य राज्यों या केंद्रीय एजेंसियों की परियोजनाओं से 12% निःशुल्क बिजली।
2. 'पिरूल लाओ-पैसे पाओ' अभियान किस जनपद से आरंभ हुआ?
- रुद्रप्रयाग
- पौड़ी
- चमोली
- अल्मोड़ा
उत्तर: रुद्रप्रयाग
मई 2024 में रुद्रप्रयाग से, वनाग्नि रोकने हेतु।
3. सौर ऊर्जा नीति 2023 के अंतर्गत भूमि बैंक के रूप में किसे अधिसूचित किया गया?
- UREDA
- UPCL
- UJVNL
- PTCUL
उत्तर: UREDA
उत्तराखंड नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (UREDA) को भूमि बैंक बनाया गया।
4. राज्य ऊर्जा नीति में कितनी क्षमता तक की परियोजना 'लघु' मानी जाती है?
- 25 मेगावाट
- 5 मेगावाट
- 2 मेगावाट
- 50 मेगावाट
उत्तर: 25 मेगावाट
25 मेगावाट तक लघु; इससे अधिक वृहद परियोजना।
5. टिहरी बाँध किन दो नदियों के संगम पर बना है?
- भागीरथी व भिलंगना
- अलकनंदा व मंदाकिनी
- यमुना व टोंस
- कोसी व रामगंगा
उत्तर: भागीरथी व भिलंगना
भागीरथी तथा भिलंगना के संगम पर; ऊँचाई लगभग 260.5 मीटर, भारत का सर्वोच्च बाँध।
6. उत्तराखंड में विद्युत पारेषण का कार्य कौन-सा निगम करता है?
- PTCUL
- UPCL
- UJVNL
- UERC
उत्तर: PTCUL
PTCUL पारेषण, UPCL वितरण तथा UJVNL उत्पादन देखता है; UERC नियामक है।
7. राज्य की प्रथम जल-विद्युत परियोजना कौन-सी थी?
- ग्लोगी (1907)
- टिहरी (2006)
- मनेरी-भाली (1984)
- धौलीगंगा (2005)
उत्तर: ग्लोगी (1907)
मसूरी के निकट ग्लोगी परियोजना 1907 में आरंभ हुई।