पर्यावरण व पारिस्थितिकी
पारिस्थितिकी जीवों व उनके पर्यावरण के संबंध का अध्ययन है। पारितंत्र में उत्पादक (हरे पौधे), उपभोक्ता व अपघटक होते हैं, और ऊर्जा आहार-शृंखला से प्रवाहित होती है। जैव विविधता, जलवायु परिवर्तन व संरक्षण प्रमुख विषय हैं; वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 भारत में प्रमुख कानून है।
पारिस्थितिकी मूल
- पारितंत्र — उत्पादक-उपभोक्ता-अपघटक; खाद्य-शृंखला व ऊर्जा-प्रवाह (10% नियम); जैव-आवर्धन।
प्रमुख अधिनियम व संस्थाएँ
| अधिनियम/संस्था | वर्ष |
|---|---|
| वन्यजीव संरक्षण अधिनियम | 1972 |
| जल प्रदूषण अधिनियम | 1974 |
| वन संरक्षण अधिनियम | 1980 |
| पर्यावरण संरक्षण अधिनियम | 1986 (भोपाल के बाद) |
| NGT | 2010 |
वैश्विक समझौते
- स्टॉकहोम 1972; रियो 1992 (UNFCCC-CBD); क्योटो 1997; पेरिस 2015 (भारत का LiFE, नेट-ज़ीरो 2070); मॉन्ट्रियल (ओज़ोन)।
जलवायु परिवर्तन
- ग्रीनहाउस गैसें (CO₂, मीथेन); ग्लोबल वार्मिंग; हिमालयी हिमनद-संकोचन (राज्य-प्रासंगिक); कार्बन-क्रेडिट व नवीकरणीय ऊर्जा।
परीक्षा-सूत्र
- अधिनियम-वर्ष तालिका; 10% ऊर्जा-नियम; पेरिस 2015/नेट-ज़ीरो 2070; स्टॉकहोम-रियो-क्योटो; NGT 2010।
विगत वर्ष प्रश्न
आहार-शृंखला में हरे पौधों को क्या कहते हैं? (प्रीलिम्स 2018)
अभ्यास प्रश्न
1. पारितंत्र में हरे पौधे कहलाते हैं —
- उत्पादक
- उपभोक्ता
- अपघटक
- परभक्षी
उत्तर: उत्पादक
हरे पौधे प्रकाश-संश्लेषण से भोजन बनाते हैं, इसलिए उत्पादक हैं।