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प्राचीन उत्तराखंड — स्रोत, कुणिंद व कार्तृपुर

उत्तराखंड का प्राचीन इतिहास तीन चरणों में पढ़ा जाता है — प्रागैतिहासिक (पत्थर के औज़ार, शैलाश्रय), आद्य-ऐतिहासिक (पुराण-महाभारत) और ऐतिहासिक (अभिलेख, सिक्के, ताम्रपत्र)। कुणिंद यहाँ के पहले प्रमाणित सिक्का-जारीकर्ता शासक थे।

प्रागैतिहासिक साक्ष्य

शैलचित्र स्थल

आद्य-ऐतिहासिक व पौराणिक संदर्भ

कुणिंद व यौधेय

कार्तृपुर व परवर्ती वंश

विगत वर्ष प्रश्न

समुद्रगुप्त की प्रयाग प्रशस्ति में उत्तराखंड का कौन-सा राज्य करद राज्य के रूप में उल्लिखित है? (प्रीलिम्स शैली)

अभ्यास प्रश्न

1. लखुउड़्यार शैलाश्रय किस नदी के तट पर स्थित है?

  1. सुयाल
  2. कोसी
  3. गोमती
  4. रामगंगा
उत्तर: सुयाल
यह अल्मोड़ा के बाड़ेछीना गाँव में सुयाल नदी के तट पर है।

2. कार्तृपुर राज्य का उल्लेख किस अभिलेख में मिलता है?

  1. प्रयाग प्रशस्ति
  2. एहोल अभिलेख
  3. जूनागढ़ अभिलेख
  4. हाथीगुम्फा अभिलेख
उत्तर: प्रयाग प्रशस्ति
समुद्रगुप्त की प्रयाग प्रशस्ति में इसे उत्तरी सीमा का करद राज्य बताया गया है।

3. जगतग्राम अश्वमेध यूप का निर्माता कौन माना जाता है?

  1. शीलवर्मन
  2. सेनावर्मन
  3. सुबाहु
  4. छगलेशदास
उत्तर: शीलवर्मन
देहरादून स्थित यह तीसरी शताब्दी ई. का यूप राजा शीलवर्मन से जोड़ा जाता है।

4. पुराणों में कुमाऊँ क्षेत्र के लिए कौन-सा नाम प्रयुक्त हुआ है?

  1. मानसखंड
  2. केदारखंड
  3. उत्तरकुरु
  4. हिमवत
उत्तर: मानसखंड
केदारखंड गढ़वाल के लिए तथा मानसखंड कुमाऊँ के लिए; नंदा देवी दोनों की विभाजक रेखा है।

5. कण्वाश्रम किस नदी के तट पर स्थित माना जाता है?

  1. मालिनी
  2. सुयाल
  3. पिंडर
  4. टोंस
उत्तर: मालिनी
मालिनी नदी तट पर, वर्तमान चौकाघाट — सम्राट भरत का जन्मस्थल।

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