न्यायपालिका — उच्चतम न्यायालय व उच्च न्यायालय
भारत में एकीकृत न्यायपालिका है — एक ही न्यायालय-पदानुक्रम केंद्रीय व राज्य दोनों विधियों को लागू करता है। उच्चतम न्यायालय का उल्लेख अनुच्छेद 124 से 147 तथा उच्च न्यायालयों का 214 से 231 तक है।
उच्चतम न्यायालय
- अनुच्छेद 124 — उच्चतम न्यायालय की स्थापना; वर्तमान स्वीकृत संख्या मुख्य न्यायाधीश सहित 34। न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा; सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष।
- क्षेत्राधिकार — मूल (अनुच्छेद 131, केंद्र-राज्य विवाद), अपीलीय, परामर्शी (अनुच्छेद 143), तथा रिट क्षेत्राधिकार (अनुच्छेद 32)। अनुच्छेद 32 को डॉ. आंबेडकर ने 'संविधान की आत्मा' कहा।
- पाँच रिट — बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण तथा अधिकार-पृच्छा। अनुच्छेद 32 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय केवल मौलिक अधिकारों हेतु, जबकि अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों तथा 'अन्य किसी प्रयोजन' दोनों हेतु रिट जारी कर सकता है — यही अंतर पूछा जाता है।
उच्च न्यायालय व उत्तराखंड
- उत्तराखंड उच्च न्यायालय की स्थापना 9 नवंबर 2000 को नैनीताल में हुई; यह राज्य का सर्वोच्च न्यायिक निकाय है। उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष है।
- उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा, भारत के मुख्य न्यायाधीश व संबंधित राज्यपाल से परामर्श के बाद; स्थानांतरण भी राष्ट्रपति द्वारा।
नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
- अनुच्छेद 148 — CAG की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा; कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु, जो पहले हो। हटाने की प्रक्रिया उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के समान है।
- डॉ. आंबेडकर ने CAG को संविधान का सर्वाधिक महत्वपूर्ण अधिकारी बताया। संघ के लेखे संबंधी प्रतिवेदन राष्ट्रपति को तथा राज्य के राज्यपाल को प्रस्तुत किए जाते हैं, जो उन्हें संबंधित विधानमंडल के समक्ष रखवाते हैं।
आधारभूत ढाँचा — निर्णयों की शृंखला
- शंकरी प्रसाद (1951) व सज्जन सिंह (1965) में संसद को मौलिक अधिकार संशोधित करने की शक्ति मानी गई; गोलकनाथ (1967) में यह शक्ति नकारी गई; केशवानंद भारती (1973) ने बीच का मार्ग निकाला — संसद संशोधन कर सकती है किंतु आधारभूत ढाँचा नहीं बदल सकती।
- मिनर्वा मिल्स (1980) ने 42वें संशोधन के उन प्रावधानों को रद्द किया जो न्यायिक समीक्षा सीमित करते थे; एस.आर. बोम्मई (1994) ने अनुच्छेद 356 के दुरुपयोग पर अंकुश लगाया तथा धर्मनिरपेक्षता को आधारभूत ढाँचे का अंग माना।
अधीनस्थ न्यायालय व विधिक सहायता
- अनुच्छेद 233-237 — अधीनस्थ न्यायालय; जिला न्यायाधीश की नियुक्ति राज्यपाल उच्च न्यायालय से परामर्श के बाद करता है। जिला न्यायालय के नीचे दीवानी पक्ष में सिविल जज तथा फ़ौजदारी पक्ष में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आते हैं।
- अनुच्छेद 39A समान न्याय व निःशुल्क विधिक सहायता का निदेश देता है, जिसे विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 ने मूर्त रूप दिया — इसी से लोक अदालत को वैधानिक दर्जा मिला। लोक अदालत का निर्णय दीवानी डिक्री के समान होता है और उसके विरुद्ध अपील नहीं होती।
विगत वर्ष प्रश्न
अनुच्छेद 32 को 'संविधान की आत्मा' किसने कहा था? (प्रीलिम्स शैली)
अभ्यास प्रश्न
1. उत्तराखंड उच्च न्यायालय की स्थापना कहाँ व कब हुई?
- नैनीताल, 9 नवंबर 2000
- देहरादून, 2000
- नैनीताल, 2007
- हल्द्वानी, 2001
उत्तर: नैनीताल, 9 नवंबर 2000
राज्य गठन के दिन ही नैनीताल में स्थापित हुआ।
2. अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय की रिट-शक्ति अनुच्छेद 32 से किस प्रकार व्यापक है?
- मौलिक अधिकारों के अतिरिक्त अन्य प्रयोजनों हेतु भी
- केवल मौलिक अधिकारों हेतु
- केवल आपातकाल में
- केवल राज्य के विरुद्ध
उत्तर: मौलिक अधिकारों के अतिरिक्त अन्य प्रयोजनों हेतु भी
अनुच्छेद 226 'अन्य किसी प्रयोजन' हेतु भी रिट की अनुमति देता है।
3. CAG का कार्यकाल कितना होता है?
- 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु
- 5 वर्ष या 62 वर्ष
- 6 वर्ष निश्चित
- राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत
उत्तर: 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु
जो पहले हो; हटाने की प्रक्रिया उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश जैसी है।
4. उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की सेवानिवृत्ति आयु क्या है?
- 62 वर्ष
- 65 वर्ष
- 60 वर्ष
- 58 वर्ष
उत्तर: 62 वर्ष
उच्च न्यायालय 62 वर्ष; उच्चतम न्यायालय 65 वर्ष।
5. 'आधारभूत ढाँचा' सिद्धांत किस वाद में प्रतिपादित हुआ?
- केशवानंद भारती, 1973
- गोलकनाथ, 1967
- मिनर्वा मिल्स, 1980
- एस.आर. बोम्मई, 1994
उत्तर: केशवानंद भारती, 1973
केशवानंद भारती (1973) — संसद संशोधन कर सकती है, किंतु आधारभूत ढाँचा नहीं बदल सकती।
6. लोक अदालत को वैधानिक दर्जा किस अधिनियम से मिला?
- विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987
- दंड प्रक्रिया संहिता 1973
- न्यायिक सुधार अधिनियम 1995
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005
उत्तर: विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987
1987 के अधिनियम से; लोक अदालत का निर्णय दीवानी डिक्री के समान होता है और अपील योग्य नहीं।
7. जिला न्यायाधीश की नियुक्ति कौन करता है?
- राज्यपाल, उच्च न्यायालय से परामर्श के बाद
- राष्ट्रपति
- मुख्यमंत्री
- भारत का मुख्य न्यायाधीश
उत्तर: राज्यपाल, उच्च न्यायालय से परामर्श के बाद
अनुच्छेद 233 के अंतर्गत राज्यपाल, संबंधित उच्च न्यायालय से परामर्श करके।