मराठा, सिख व जाट
शिवाजी: अफ़ज़ल ख़ान 1659, शाइस्ता ख़ान 1663, सूरत 1664; पुरंदर संधि 1665 (जयसिंह); आगरा से पलायन 1666; राज्याभिषेक 1674, रायगढ़ — 'छत्रपति'; अष्टप्रधान मंत्रिपरिषद; चौथ-सरदेशमुखी। पेशवा युग: बाजीराव I का विस्तार; तृतीय पानीपत 1761 — अहमदशाह अब्दाली से पराजय। सिख: गुरु नानक से गुरु गोविंद सिंह — ख़ालसा 1699; रणजीत सिंह का लाहौर राज्य। जाट: सूरजमल — भरतपुर।
शिवाजी — घटनाक्रम
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1659 | प्रतापगढ़ — अफ़ज़ल ख़ाँ |
| 1663-64 | शाइस्ता ख़ाँ पर छापा; सूरत-लूट |
| 1665 | पुरंदर संधि (जयसिंह) — 23 दुर्ग |
| 1666 | आगरा से पलायन |
| 1674 | रायगढ़ राज्याभिषेक — छत्रपति (गागाभट्ट) |
प्रशासन
- अष्टप्रधान — पेशवा, अमात्य, सचिव, मंत्री, सेनापति, सुमंत, न्यायाधीश, पंडितराव।
- कर: चौथ (चौथाई) व सरदेशमुखी (दसवाँ) — प्रभाव-क्षेत्रों से।
पेशवा-युग
- बालाजी विश्वनाथ (1713) — मुग़ल-संधि 1719; बाजीराव I (1720-40) — पालखेड़ 1728, दिल्ली-दौड़ 1737।
- 1761: तृतीय पानीपत (14 जनवरी) — अब्दाली से महासंहार; सदाशिवराव भाऊ; फिर माधवराव में पुनरुत्थान; संघ — सिंधिया, होल्कर, गायकवाड़, भोंसले।
सिख शक्ति
- गुरु अर्जुन — आदि ग्रंथ, 1606 बलिदान; तेग बहादुर 1675; गोविंद सिंह — ख़ालसा 1699 (पाँच ककार)।
- बंदा बहादुर (1716 में वध); मिसलें → रणजीत सिंह — लाहौर 1799, अमृतसर संधि 1809।
जाट व रोहिला
- सूरजमल — भरतपुर का 'अफ़लातून'; रोहिले — वही शक्ति जिसने 1744 में अल्मोड़ा पर धावा बोला (चंद-विषय से जोड़ें)।
परीक्षा-सूत्र
- 1674; पुरंदर 1665; अष्टप्रधान; चौथ-सरदेशमुखी; पानीपत 1761; ख़ालसा 1699; अमृतसर 1809।
विगत वर्ष प्रश्न
राज्याभिषेक वर्ष; ख़ालसा पंथ (पैटर्न)
अभ्यास प्रश्न
1. शिवाजी का राज्याभिषेक हुआ —
- 1674, रायगढ़
- 1665, पुरंदर
- 1680, सिंहगढ़
- 1659, प्रतापगढ़
उत्तर: 1674, रायगढ़
1674 — छत्रपति की उपाधि, रायगढ़ दुर्ग।
2. ख़ालसा पंथ की स्थापना (1699) की —
- गुरु गोविंद सिंह
- गुरु नानक
- गुरु अर्जुन
- गुरु तेग बहादुर
उत्तर: गुरु गोविंद सिंह
दसवें गुरु — आनंदपुर साहिब, बैसाखी 1699।
← उत्तराखंड का इतिहास व संस्कृति के सभी विषय · पूरा पाठ्यक्रम
निःशुल्क ऐप खोलें — devbhoomipcs.com