महाजनपद, मगध व धार्मिक आंदोलन
बौद्ध ग्रंथ (अंगुत्तर निकाय) 16 महाजनपद गिनाते हैं। मगध का उत्कर्ष: बिम्बिसार-अजातशत्रु (हर्यंक), राजगृह से पाटलिपुत्र; कारण — लोहा, उपजाऊ भूमि, नदियाँ। जैन धर्म: महावीर 24वें तीर्थंकर, त्रिरत्न, अहिंसा। बौद्ध धर्म: बुद्ध — जन्म लुंबिनी, ज्ञान बोधगया, प्रथम उपदेश सारनाथ (धर्मचक्रप्रवर्तन), महापरिनिर्वाण कुशीनगर; चार आर्य सत्य; प्रथम संगीति राजगृह। भागवत (वासुदेव-पूजा) व शैव मत। पारसी संपर्क: डेरियस ने उ.प. भारत जोड़ा; यूनानी: सिकंदर 326 ई.पू., झेलम (हाइडेस्पीज़) में पोरस से युद्ध।
सोलह महाजनपद
- सूची — अंगुत्तर निकाय (बौद्ध) व भगवती सूत्र (जैन); बड़े चार — मगध, कोसल, वत्स, अवंति।
- वज्जि (वैशाली) — गणसंघ/गणराज्य का क्लासिक उदाहरण।
मगध का उत्कर्ष — कारण
- लोहा निकट, उपजाऊ गंगा-मैदान, नदियाँ (रक्षा+व्यापार), वन-हाथी, महत्वाकांक्षी शासक।
मगध-वंश
| शासक/वंश | मुख्य बात |
|---|---|
| बिम्बिसार | हर्यंक; राजगृह; वैवाहिक कूटनीति; बुद्ध-समकालीन |
| अजातशत्रु | वज्जि-युद्ध — रथमूसल व महाशिलाकंटक |
| उदयिन | पाटलिपुत्र बसाया |
| शिशुनाग | अवंति मिलाई |
| महापद्म नंद | 'एकराट' — प्रथम साम्राज्य-निर्माता; अपार कोष |
जैन धर्म
- महावीर — 24वें तीर्थंकर (कुंडग्राम); पाँच व्रत (पाँचवाँ ब्रह्मचर्य महावीर ने जोड़ा); त्रिरत्न।
- संघ-भेद — दिगंबर/श्वेतांबर (भद्रबाहु-स्थूलभद्र, मगध-अकाल के बाद); संगीतियाँ — पाटलिपुत्र व वल्लभी।
बौद्ध धर्म
- चार आर्य सत्य, अष्टांगिक मार्ग, मध्यम प्रतिपदा; संघ में स्त्री-प्रवेश (महाप्रजापति गौतमी)।
पारसी-यूनानी संपर्क
- डेरियस (~516 ई.पू.) — उ.प. भारत फ़ारसी क्षत्रपी; प्रभाव — खरोष्ठी लिपि।
- सिकंदर 326 ई.पू. — झेलम (हाइडेस्पीज़) में पोरस; प्रभाव — मार्ग खुले, यूनानी विवरण।
उत्तराखंड कोण
- इसी जनपद-युग की समानांतर पहाड़ी राजनीति — कुणिंद; आगे चलकर अमोघभूति की चाँदी की मुद्राएँ (कुणिंद-विषय से जोड़ें)।
परीक्षा-सूत्र
- अंगुत्तर निकाय; वज्जि-गणराज्य; पाटलिपुत्र-उदयिन; संगीति-तालिका; महावीर 24वें; हाइडेस्पीज़ 326।
विगत वर्ष प्रश्न
महावीर कौन-से तीर्थंकर; बुद्ध का प्रथम उपदेश (पैटर्न)
अभ्यास प्रश्न
1. महावीर थे —
- 24वें तीर्थंकर
- पहले तीर्थंकर
- 23वें तीर्थंकर
- बुद्ध के शिष्य
उत्तर: 24वें तीर्थंकर
ऋषभदेव प्रथम; पार्श्वनाथ 23वें; महावीर 24वें व अंतिम।
2. बुद्ध ने प्रथम उपदेश कहाँ दिया?
- सारनाथ
- बोधगया
- लुंबिनी
- कुशीनगर
उत्तर: सारनाथ
धर्मचक्रप्रवर्तन — सारनाथ (मृगदाव)।
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