मौलिक अधिकार
मौलिक अधिकार संविधान के भाग III (अनुच्छेद 12–35) में हैं और न्यायालय में प्रवर्तनीय हैं। छह श्रेणियाँ: समानता, स्वतंत्रता, शोषण के विरुद्ध, धार्मिक स्वतंत्रता, सांस्कृतिक-शैक्षिक, व संवैधानिक उपचार। अनुच्छेद 32 को अंबेडकर ने संविधान की 'आत्मा' कहा।
मूल अधिकार — छह
| अधिकार | अनुच्छेद |
|---|---|
| समता | 14-18 |
| स्वतंत्रता | 19-22 |
| शोषण-विरुद्ध | 23-24 |
| धर्म-स्वातंत्र्य | 25-28 |
| संस्कृति-शिक्षा | 29-30 |
| संवैधानिक उपचार | 32 |
मुख्य अनुच्छेद
- अनु. 14-16: विधि के समक्ष समता; भेदभाव-निषेध; लोक-नियोजन में अवसर-समता।
- अनु. 19: छह स्वतंत्रताएँ (भाषण, सभा, संगम, संचरण, निवास, वृत्ति) — युक्तियुक्त निर्बंधन सहित।
- अनु. 21: प्राण व दैहिक स्वतंत्रता — निरंतर विस्तार: निजता (पुट्टस्वामी 2017), पर्यावरण, त्वरित न्याय।
- अनु. 32: आंबेडकर का 'हृदय व आत्मा'; पाँच रिट — बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण, अधिकार-पृच्छा।
प्रमुख न्याय-निर्णय
| वाद | सिद्धांत |
|---|---|
| गोलकनाथ 1967 | संसद मूल अधिकार नहीं छीन सकती |
| केशवानंद 1973 | मूल ढाँचा सिद्धांत |
| मेनका गांधी 1978 | अनु. 21 में 'विधि की उचित प्रक्रिया' |
| पुट्टस्वामी 2017 | निजता मूल अधिकार |
संबंधित प्रावधान
- मूल कर्तव्य — भाग IVA, अनु. 51A (11; 42वें ने 10, 86वें ने 11वाँ जोड़ा); संपत्ति का अधिकार 44वें (1978) से हटा — अब अनु. 300A विधिक अधिकार।
परीक्षा-सूत्र
- अधिकार-अनुच्छेद तालिका; अनु. 32 पाँच रिट; अनु. 21 विस्तार; वाद-तालिका; संपत्ति 44वें से।
विगत वर्ष प्रश्न
संवैधानिक उपचार का अधिकार किस अनुच्छेद में है? (प्रीलिम्स 2018)
अभ्यास प्रश्न
1. किस अनुच्छेद को संविधान की 'आत्मा' कहा जाता है?
- अनुच्छेद 32
- अनुच्छेद 21
- अनुच्छेद 14
- अनुच्छेद 19
उत्तर: अनुच्छेद 32
अनुच्छेद 32 (संवैधानिक उपचार) को अंबेडकर ने 'आत्मा' कहा।