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लोकोक्तियाँ — औखाण व पखाणा

कुमाऊँनी में लोकोक्ति को 'औखाण' (आख्यान) या 'किस्स' तथा गढ़वाली में 'पखाणा' (उपाख्यान) कहते हैं। ये अनाम लोक-रचनाएँ हैं, जिनमें डॉ. पीतांबर दत्त बड़थ्वाल के शब्दों में 'गागर में सागर' भरा होता है।

स्वरूप व वर्गीकरण

कुमाऊँनी औखाण — चयनित

गढ़वाली पखाणा — चयनित

इतिहास-वाहक लोकोक्तियाँ

विगत वर्ष प्रश्न

कुमाऊँनी बोली में लोकोक्ति को किस नाम से जाना जाता है? (UKSSSC शैली)

अभ्यास प्रश्न

1. गढ़वाली में लोकोक्ति को क्या कहते हैं?

  1. पखाणा
  2. औखाण
  3. किस्स
  4. जागर
उत्तर: पखाणा
गढ़वाली में 'पखाणा' तथा कुमाऊँनी में 'औखाण' या 'किस्स'।

2. 'गोरख्याणी मचीं छ' लोकोक्ति किस काल की स्मृति है?

  1. 1803–1815 गोरखा शासन
  2. 1815–1947 ब्रिटिश शासन
  3. चंद-पँवार युद्ध
  4. नादिरशाह का आक्रमण
उत्तर: 1803–1815 गोरखा शासन
1803 से 1815 तक गढ़वाल पर गोरखा शासन के अत्याचारों की स्मृति।

3. 'एक सिंह माधोसिंह' लोकोक्ति किस सेनानायक से संबंधित है?

  1. माधोसिंह भंडारी
  2. पुरुषोत्तम पंत
  3. गबर सिंह नेगी
  4. नीलू कठायत
उत्तर: माधोसिंह भंडारी
टिहरी के पँवार शासक महिपतिशाह (1625-1633) के सेनानायक माधोसिंह भंडारी।

4. मुन्स्यारी तहसील 1960 से पूर्व किस परगने के नाम से जानी जाती थी?

  1. जोहार
  2. दानपुर
  3. गंगोली
  4. सोर
उत्तर: जोहार
पिथौरागढ़ की मुन्स्यारी तहसील 1960 से पूर्व जोहार परगना कहलाती थी।

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