कत्यूरी राजवंश (उत्तराखंड)
कत्यूरी उत्तराखंड का आरंभिक-मध्यकालीन राजवंश था (लगभग 7वीं–11वीं सदी)। इसकी राजधानी कार्तिकेयपुर (बैजनाथ, कुमाऊँ) थी; इसने गढ़वाल व कुमाऊँ को जोड़ा और जागेश्वर जैसे मंदिर बनवाए।
पहचान व स्रोत
- एकीकृत उत्तराखंड पर शासन करने वाला पहला ऐतिहासिक राजवंश (~7वीं–11वीं सदी)।
- स्रोत: पांडुकेश्वर व बागेश्वर ताम्रपत्र, तालेश्वर अभिलेख; लोक-जागर — राजुला-मालूशाही गाथा कत्यूरी राजकुमार से जुड़ी।
संस्थापक — मत-भेद
- परंपरा: वासुदेव (वसुदेव) कत्यूरी — जोशीमठ का प्राचीन वासुदेव (बासदेव) मंदिर उन्हीं से जुड़ा; कुछ इतिहासकार बसंतदेव को संस्थापक मानते हैं; एटकिंसन दोनों को एक ही मानते हैं। परीक्षा में दोनों नाम याद रखें।
- उद्गम: मत — कुणिंद-वंशज (पॉवेल), खस मूल, अयोध्या-शालिवाहन (बद्रीदत्त पांडे)।
राजधानी
- आरंभिक पीठ — जोशीमठ (अलकनंदा घाटी); फिर कार्तिकेयपुर — आज का बैजनाथ (कत्यूर घाटी, गोमती-तट, बागेश्वर)।
प्रशासन व राजस्व
- साम्राज्यिक उपाधियाँ — परमभट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर (ललितशूरदेव, पांडुकेश्वर पत्र)।
- इकाइयाँ — प्रांत (उपरिक) व विषय (विषयपति); भूमि-अनुदान ताम्रपत्रों पर अंकित।
चरम व प्रमुख शासक
- 9वीं सदी में चरम — ललितशूरदेव; परंपरागत दावा 'नेपाल से काबुल तक' (अतिरंजित परंपरा — सावधानी से उद्धृत करें)।
- भूदेव — बैजनाथ-बागेश्वर मंदिर-निर्माता; कटारमल्ल — कटारमल सूर्य मंदिर।
मंदिर व कला
- बड़ा नवाचार — ईंट के स्थान पर तराशा पत्थर; उत्तराखंड के अधिकांश प्राचीन मंदिर कत्यूरी देन।
- जागेश्वर समूह (लकुलीश, महिषासुरमर्दिनी, नवदुर्गा, नटराज); कटारमल सूर्य (~44 उप-मंदिर); बैजनाथ समूह; बद्रीनाथ-मार्ग के देवालय।
पतन व शाखाएँ
- 11वीं–12वीं सदी में विखंडन — आठ रियासतें: बैजनाथ, द्वाराहाट, डोटी, बारामंडल, अस्कोट, सीरा, सोरा, सुई।
- अस्कोट रजवार शाखा 1279 (अभयपाल देव); कालांतर में चंदों ने स्थान लिया।
परीक्षा-सूत्र
- 'पहला ऐतिहासिक राजवंश'; जोशीमठ→कार्तिकेयपुर; पांडुकेश्वर ताम्रपत्र; कटारमल; राजुला-मालूशाही।
विगत वर्ष प्रश्न
कत्यूरी राजवंश की राजधानी कौन-सी थी? (प्रीलिम्स 2018)
अभ्यास प्रश्न
1. कत्यूरी राजवंश की राजधानी थी —
- कार्तिकेयपुर
- अल्मोड़ा
- श्रीनगर
- चम्पावत
उत्तर: कार्तिकेयपुर
कत्यूरियों की राजधानी कार्तिकेयपुर (बैजनाथ) थी।
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