हड़प्पा सभ्यता
सिंधु घाटी/हड़प्पा सभ्यता (लगभग 2600–1900 ई.पू.) अपनी नगर-योजना, ग्रिड सड़कों व उन्नत जल-निकासी के लिए जानी जाती है। मोहनजोदड़ो का विशाल स्नानागार व अब तक न पढ़ी गई लिपि प्रमुख विशेषताएँ हैं।
विस्तार व प्रमुख स्थल
- पूर्व में आलमगीरपुर (उ.प्र.) से पश्चिम में सुत्कागेंडोर (बलूचिस्तान) — लगभग त्रिभुजाकार विस्तार।
- नगरीय: हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, धोलावीरा, कालीबंगा, लोथल, राखीगढ़ी (सबसे बड़ा भारतीय स्थल)।
- नदी-तट: हड़प्पा — रावी; मोहनजोदड़ो — सिंधु; कालीबंगा — घग्घर; लोथल — भोगावो।
नगर-योजना व स्थापत्य
- ग्रिड प्रणाली — सड़कें समकोण पर काटतीं; नगर दो भागों में — ऊँचा दुर्ग (citadel) व निचला नगर।
- पक्की ईंटें (अनुपात 4:2:1), ढकी हुई नालियाँ — विश्व की प्राचीनतम जल-निकासी प्रणाली।
- प्रतीक निर्माण: विशाल स्नानागार (मोहनजोदड़ो), अन्नागार, लोथल का गोदीवाड़ा (डॉकयार्ड), धोलावीरा का जल-प्रबंधन।
सामाजिक जीवन
- प्रमाणित स्मारकीय मंदिर/राजमहल नहीं — संभवतः व्यापारी-प्रधान समतामूलक समाज।
- मातृ-देवी पूजा, पशुपति-मुहर, पीपल वृक्ष व कूबड़ बैल की पूजा के संकेत।
- खिलौने, पासे, आभूषण — मनीषित संस्कृति; 'नर्तकी' कांस्य-मूर्ति (मोहनजोदड़ो)।
मुहरें, उपकरण व कला
- मुहरें: सेलखड़ी (steatite) की; एकशृंगी (unicorn) सर्वाधिक; पशुपति मुहर; व्यापार व पहचान हेतु।
- उपकरण: कांस्य-युगीन — तांबा+टिन के औजार; लोहे का ज्ञान नहीं था।
- चित्रकला-रंग: मृद्भांडों पर काले अलंकरण लाल पृष्ठभूमि पर — 'काले-पर-लाल' मृद्भांड।
- रत्न: कार्नेलियन (गुजरात), लाजवर्द (अफ़गानिस्तान), सीप-मणके — मणका-निर्माण बड़ा उद्योग।
अर्थव्यवस्था व चरण
| चरण | काल | विशेषता |
|---|---|---|
| पूर्व हड़प्पा | ~3300–2600 ई.पू. | ग्राम, प्रारंभिक खेती |
| परिपक्व | ~2600–1900 ई.पू. | नगर, मुहरें, मानक बाट |
| उत्तर | ~1900–1300 ई.पू. | नगरीय ह्रास |
एशिया से व्यापार
- मेसोपोटामिया से व्यापार — सुमेरी अभिलेखों में 'मेलुहा' (संभवतः सिंधु क्षेत्र)।
- बंदरगाह लोथल; मार्ग — फारस की खाड़ी, बहरीन (दिलमुन), ओमान (मगान)।
- निर्यात — सूती वस्त्र, मणके, हाथीदांत; आयात — तांबा, चांदी, लाजवर्द, टिन।
परिपक्व स्थलों के विकास के कारण
- सिंधु-घग्घर की उपजाऊ लोंड़ भूमि ने अधिशेष अन्न → नगरीकरण संभव बनाया।
- मानक बाट-माप, मुहरें व लिपि → संगठित व्यापार व प्रशासन।
- जल-प्रबंधन (धोलावीरा जलाशय, कूएँ) → सूखे क्षेत्रों में भी नगर।
पतन के संभावित कारण
- कोई एकमत नहीं — बहु-कारणीय ह्रास (लगभग 1900 ई.पू.)।
- पर्यावरण: घग्घर (सरस्वती) का सूखना, बाढ़, जलवायु परिवर्तन, भू-संचलन।
- अन्य: व्यापार में गिरावट, मृदा-क्षय, आर्य-आगमन सिद्धांत (अब कम मान्य)।
विगत वर्ष प्रश्न
विशाल स्नानागार किस स्थल पर मिला? (प्रीलिम्स 2017)
अभ्यास प्रश्न
1. विशाल स्नानागार किस स्थल से संबंधित है?
- मोहनजोदड़ो
- हड़प्पा
- लोथल
- धोलावीरा
उत्तर: मोहनजोदड़ो
विशाल स्नानागार मोहनजोदड़ो की प्रमुख संरचना है।
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