गोरखा व ब्रिटिश शासन
गोरखाओं ने कुमाऊँ (1790) व गढ़वाल (1804) पर अधिकार किया। आंग्ल-नेपाल युद्ध (1814–16) के बाद सुगौली संधि (1816) से कुमाऊँ व पूर्वी गढ़वाल अंग्रेज़ों को मिले; टिहरी पंवारों के अधीन रियासत बनी रही।
विजय-क्रम
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1790 | कुमाऊँ विजय — हवालबाग़; महेंद्रचंद पलायन |
| 1791 | गढ़वाल पर पहला हमला — लंगूरगढ़ की घेराबंदी विफल |
| 1803 | भूकंप से कमज़ोर गढ़वाल पर विजय |
| 1804 | खुड़बुड़ा (देहरादून) — प्रद्युम्न शाह वीरगति |
शासन व 'गोरख्याणी'
- अल्मोड़ा व श्रीनगर से सूबा-शासन; भारी कर, बेगार व दास-व्यापार की स्मृति — दमन-काल को लोक में 'गोरख्याणी' कहा गया।
प्रतिरोध व पतन
- हर्षदेव जोशी की ब्रिटिश-गोलबंदी; आंग्ल-नेपाल युद्ध 1814–16।
- 1815: कर्नल निकोल्स ने 26 अप्रैल 1815 को अल्मोड़ा लिया; स्याहीदेवी की लड़ाई निर्णायक।
- सुगौली: संधि — हस्ताक्षर दिसंबर 1815, अनुसमर्थन 4 मार्च 1816; काली नदी नेपाल-सीमा बनी।
परिणाम
- कुमाऊँ + पूर्वी गढ़वाल ब्रिटिश (नॉन-रेगुलेशन प्रांत — ट्रेल-युग आरंभ); पश्चिमी गढ़वाल सुदर्शन शाह की टिहरी रियासत।
परीक्षा-सूत्र
- 1790 / 1803 / 1804 खुड़बुड़ा / 26 अप्रैल 1815 / सुगौली 1816 — तिथि-मिलान लगभग निश्चित प्रश्न।
विगत वर्ष प्रश्न
1816 की किस संधि से कुमाऊँ अंग्रेज़ों को मिला? (प्रीलिम्स 2018)
अभ्यास प्रश्न
1. किस 1816 संधि ने कुमाऊँ अंग्रेज़ों को सौंपा?
- सुगौली
- लाहौर
- इलाहाबाद
- अमृतसर
उत्तर: सुगौली
सुगौली संधि (1816) ने गोरखा शासन समाप्त किया।
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