चिपको आंदोलन
चिपको एक अहिंसक वन-संरक्षण आंदोलन था। इसकी शुरुआत 1973 में चमोली के मंडल गाँव से चंडी प्रसाद भट्ट के नेतृत्व में हुई; 1974 की प्रसिद्ध रैणी घटना का नेतृत्व गौरा देवी ने किया। सुंदरलाल बहुगुणा ने इसे राष्ट्रीय पहचान दी।
पृष्ठभूमि
- 1962 के बाद सड़क-निर्माण व व्यावसायिक कटान; 1970 की अलकनंदा महाबाढ़ ने वन-विनाश और बाढ़ का रिश्ता उजागर किया।
घटनाक्रम
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1964 | दशौली ग्राम स्वराज्य संघ, गोपेश्वर — चंडीप्रसाद भट्ट |
| 1973 | मंडल — साइमंड्स कंपनी को अंगू (ऐश) के पेड़ नहीं |
| 26 मार्च 1974 | रेणी — गौरा देवी व 27 महिलाएँ पेड़ों से चिपकीं |
| 1977-78 | बहुगुणा के अनशन-पदयात्राएँ |
| 1980 | 1000 मी. से ऊपर हरे कटान पर 15-वर्षीय रोक (इंदिरा गांधी) |
लोग
- गौरा देवी (रेणी की नायिका); चंडीप्रसाद भट्ट (मैग्सेसे 1982); सुंदरलाल बहुगुणा — 'पारिस्थितिकी ही स्थायी अर्थव्यवस्था'; घनश्याम सैलानी — आंदोलन के गीतकार।
चरित्र व नारा
- गांधीवादी, स्त्री-नेतृत्व; नारा — 'क्या हैं जंगल के उपकार? मिट्टी, पानी और बयार।'
विरासत
- अप्पिको (कर्नाटक, 1983 — पांडुरंग हेगड़े); वन संरक्षण अधिनियम 1980 पर प्रभाव; विश्व-भर के पर्यावरण-विमर्श में स्थान।
परीक्षा-सूत्र
- रेणी 26 मार्च 1974; गौरा देवी; मंडल 1973; 1980 की रोक; मैग्सेसे-भट्ट।
विगत वर्ष प्रश्न
रैणी गाँव की घटना किस वर्ष हुई? (प्रीलिम्स 2019)
अभ्यास प्रश्न
1. 1974 का प्रसिद्ध चिपको प्रदर्शन किस गाँव में हुआ?
- रैणी
- टिहरी
- नैनीताल
- अल्मोड़ा
उत्तर: रैणी
चमोली ज़िले के रैणी गाँव में गौरा देवी के नेतृत्व में।
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